पार्क की जमीन पर पट्टे देने के आरोप को आयुक्त ने किया खारिज

शहर के डाइट रोड इलाके में १८ हजार ७०० वर्ग फीट पार्क की जमीन पर पट्टे देने का आरोप लगाते हुए े कुछ लोगों ने आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। इधर आयुक्त ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है। आयुक्त का कहना है कि परिषद में इस तरह की कोई कार्रवाई न तो लंबित है और न ही प्रस्तावित है।

By: jitender saran

Updated: 18 Jun 2021, 01:05 PM IST

चित्तौडग़ढ़
जानकारी के अनुसार पार्षद छोटूसिंह शेखावत, निलेश बल्दवा, चेतन खत्री, मनोहरलाल शर्मा सहित कुछ लोगों ने जिला कलक्टर व आयुक्त को ज्ञापन सौंपा, जिसमें बताया कि राजस्व ग्राम मीठाराम जी का खेड़ा में डाइट रोड़ पर आराजी नंबर 5771 एवं अन्य रकबा 5.22 हैक्टेयर 4 नवंबर 2008 को समपर्ण होकर नगर परिषद के नाम दर्ज हुई थी। इस कॉलोनी में 18700 वर्गफीट का पार्क की आरक्षित भूमि छोड़ी जाकर बाकी के पट्टे जारी कर दिए थे। वर्ष 2013 में नगर परिषद ने इस पार्क की चार दीवारी बना कर लोहे की रेलिंग व बड़ा गेट लगवा दिया था। नगर परिषद द्वारा यह कार्य ठेकेदार अरविन्द व्यास से करवाया गया था। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि कॉलोनाइजर की ओर से इस जमीन के पट्टे लेने के लिए नगर परिषद में नियम विरूद्ध आवेदन किया गया। कॉलोनाइजर पार्क की जमीन को अपनी निजी संपति बता रहा है। एसडीएम चित्तौडग़ढ़ ने भी अपने आदेश में तथा नगर नियोजक ने स्पष्ट आदेश दिए है कि सड़कों और आरक्षित भूमि का नि:शुल्क समपर्ण करने के बाद ही ही पट्टे जारी किए जाए। ज्ञापन में पार्क की जमीन पर पट्टे जारी नहीं करने की मांग की गई है।

आयुक्त बोलीं, सब आरोप झूठे
इधर नगर परिषद आयुक्त रिंकल गुप्ता ने बताया कि ज्ञापन में पट्टे देने की तैयारी के जो आरोप लगाए गए है, वह सब झूठे आरोप है। उन्होंने बताया कि कॉलोनाइजर ने पट्टे प्राप्त करने के लिए नगर परिषद में कोई आवेदन प्रस्तुत नहीं किया है और नगर परिषद के स्तर पर भी ऐसा कोई प्रकरण विचाराधीन नहीं है। उन्होंने बताया कि रोशनलाल संचेती पुत्र भैरूलाल संचेती के नाम से राजस्व ग्राम मीठाराम जी का खेड़ा में 36181.22 वर्ग गज का पट्टा वर्ष 2011 में जारी किया गया था। स्वीकृत नक्शे में 18615 वर्ग फीट भूमि को वरिष्ठ नगर नियोजक ने आरक्षित दर्शाया था। रोशनलाल संचेती ने आरक्षित भूमि का पट्टे के लिए 16 जून 2015 को आवेदन प्रस्तुत किया था और विद्युत हाईटेंशन लाइन हटाने के लिए दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। इनके आवेदन पर वरिष्ठ नगर नियोजन विभाग उदयपुर को संशोधन के लिए नक्शे प्रस्तुत किए गए, इसके बाद कार्यालय वरिष्ठ नगर नियोजक के पत्र क्रमांक यूडीआर/ 1628/सीटीटी/2509-2510 दिनंाक 27.11.2015 के जरिए संशोधित मानचित्र को निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद पत्रावली में किसी भी प्रकार की कार्रवाई शेष नहीं है और न ही किसी तरह का आवेदन प्राप्त हुआ है। आयुक्त ने कहा कि सिर्फ प्रचार-प्रसार करने के लिए इस तरह का ज्ञापन दिया गया है।

jitender saran Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned