सेहत सुरक्षा के लिए भी जंग लड़ रहे यहां के कोरोना यौद्धा

शक्ति व भक्ति की नगरी चित्तौैडग़ढ़ में स्थित सैनिक स्कूल से पढ़कर निकले छात्र भारतीय सेना में अपनी शूरवीरता का लोहा मनवा चुके हैं। यहां से निकले छात्र अब कोविड 19 महामारी के खिलाफ देश में चल रही जंग में भी डॉक्टर बनकर कोरोना योद्धा के रूप में राष्ट्र सेवा में लगे है। सैन्य क्षेत्र में मशहूर इस स्कूल ने अब तक देश को 60 से अधिक डॉक्टर दिये है जो राष्ट्र सेवा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। इनमें से कई सेना में ही चिकित्सक के रूप में सेवाएं दे रहे है।

By: Nilesh Kumar Kathed

Published: 01 Jul 2020, 05:04 PM IST

चित्तौडग़ढ़. शक्ति व भक्ति की नगरी चित्तौैडग़ढ़ में स्थित सैनिक स्कूल से पढ़कर निकले छात्र भारतीय सेना में अपनी शूरवीरता का लोहा मनवा चुके हैं। यहां से निकले छात्र अब कोविड 19 महामारी के खिलाफ देश में चल रही जंग में भी डॉक्टर बनकर कोरोना योद्धा के रूप में राष्ट्र सेवा में लगे है। सैन्य क्षेत्र में मशहूर इस स्कूल ने अब तक देश को 60 से अधिक डॉक्टर दिये है जो राष्ट्र सेवा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। इनमें से कई सेना में ही चिकित्सक के रूप में सेवाएं दे रहे है तो कई सामान्य चिकित्सालयों में सेवारत है। स्कूल के जनसंपर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान ने बताया कि यहां से पढ़कर सिविल सेवा के साथ.साथ भारतीय सेना में भी डॉक्टर बने छात्र इस महामारी के बीच अपनी सेवाएं दे रहे हैं। चिकित्सक के रूप में कोरोना यौद्धा बने यहां के पूर्व छात्र सैनिक की तरह ही लोगों की जिंदगी बचाने के लिए दिनरात सेवाएं दे रहे है।
स्कूल के पूर्व छात्र ब्रिगेडिएर योगेन्द्र सिंह कमांड हॉस्पिटल पुणे, सुशील कुमार परमार जॉइंट डायरेक्टर मेडिकल जयपुर, डॉ योगिराज इन्दोरिया जयपुर के रामगंज के हॉटस्पॉट एरिया के सीएमएचओ के रूप में सेवाएं दे रहे है। न्यूरोसर्जन डॉ उदय भोमिक गीतांजलि मेडिकल कॉलेज उदयपुर, डॉ ललित कुमार गुप्ता आर एन टी मेडिकल कॉलेज उदयपुर ,लेफ्टिनेंट धर्मबीर सिंह, कैप्टेन अभिषेक कुमार, डॉ राजकुमार मीना, डॉ सुनील मीना, डॉ अभिषेक, डॉ हेमन्त रूहेला, डॉ सुरेन्द्र सिंह राठौर, डॉ नितिन, डॉ सुरेन्द्र सोंखिया, डॉ अशोक कुमार, डॉ योगेन्द्र सिंह, डॉ जयवंत आर, डॉ मुकेश कुमार सैनी, डॉ गिरधारी सिंह बजिया, डॉ योगेश इन्दोरिया,डॉ महेंद्र सिंह देवड़ा, डॉ अजयपाल सिंह, आदि सभी स्कूल से शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर बने है।
छह दशक पुराना है चित्तौड़ का सैनिक स्कूल
केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय ने सात अगस्त 1961 को देश में पहले पांच सैनिक स्कूलों की स्थापना के समय एक सैनिक स्कूल की स्थापना चित्तौडगढ़़ में की थी। स्थापना के बाद से ही इस सैनिक स्कूल ने देश की थल, जल व वायु सेना को बेहतरीन क्षमता वाले सैन्य अधिकारी दिए। चित्तौडगढ़़ सैनिक स्कूल में पढ़कर जनरल दलबीरसिंह सुहाग देश की सेना में सर्वोच्च पद पर पहुंचे। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनकड़ भी यहां के विद्यार्थी रहे है। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल मांधाता सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल एटी पारनायक, लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल नरेन्द्रसिंह सहित कई अधिकारी चित्तौडग़ढ़ सैनिक स्कूल में पढ़ चुके हैं। यहां पढ़े छात्रों में से कई चिकित्सक,पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के रूप में भी सेवा दे रहे हैं।

कोरोना योद्धा के रूप में राष्ट्र सेवा
आज मुझे बड़ा गर्व महसूस हो रहा है कि मेरे सैनिक स्कूल से पढ़कर निकले छात्र आज भारतीय सेना में ही नहीं बल्कि कोविड 19 कि इस महामारी के समय कोरोना योद्धा के रूप में राष्ट्र सेवा कर अपना लोहा मनवा रहे है। इस अवसर पर स्कूल से निकले सभी कोरोना योद्धाओ को शुभकामनाए देता हूँ।
जगदीप धनकड़, राज्यपाल पश्चिम बंगाल एवं पूर्व छात्र सैनिक स्कूल चित्तौडग़ढ़

राष्ट्र सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे

यह स्कूल के लिये बड़े गौरव की बात है कि अब तक स्कूल ने देश को 60 से अधिक डॉक्टर दिये है जो राष्ट्र सेवा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है । मै डॉक्टर्स डे के इस अवसर पर सभी कोरोना योद्धाओ को शुभकामनाए देता हूँ ।
कर्नल राजेश राघव, प्राचार्य, सैनिक स्कूल, चित्तौडग़ढ़

स्कूल के लिये बड़े गौरव की बात
कोविड 19 कि इस महामारी के समय स्कूल से निकले अनेक छात्र आज डॉक्टर बनकर कोरोना योद्धा के रूप में राष्ट्र सेवा कर अपना लोहा मनवा रहे है। यह स्कूल के लिये बड़े गौरव की बात है ।
लेफ्टिनेट कमांडर मनीष चौधरी, उप प्राचार्य, सैनिक स्कूल, चित्तौडग़ढ़

Nilesh Kumar Kathed Bureau Incharge
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