निजी बस संचालक बोले, साहब! अब तो घर चलाना भी हो रहा है मुश्किल

कोरोना काल में आर्थिक हालात खराब होने का तर्क देते हुए निजी बस संचालकों ने टैक्स में छूट की मांग को लेकर प्राइवेट बस एसोसिएशन के बैनर तले जिला कलक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया कि कोरोना काल में लॉकडाउन की वजह से शादी-ब्याह, पिकनिक, यात्राएं और स्कूल बंद हो गए। जिससे निजी बसों का संचालन भी नहीं हुआ और व्यवसाय ठप हो गया। ऐसे हालात में निजी बसों के मालिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया।

By: jitender saran

Published: 11 Jun 2021, 10:26 AM IST

चित्तौडग़ढ़
ज्ञापन में बताया कि पिछले एक साल से डीजल की बढती कीमतों के चलते संकट पैदा हो गया है। ज्ञापन में मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि स्टेट कैरिज से सरकार को जो टैक्स प्राप्त होता है, उसमें छूट दी जाए। एसोसिएशन के सचिव इरशाद मोहम्मद ने बताया कि वर्तमान में डीजल का मूल्य 93 रुपए प्रति लीटर के आसपास हो गया है और कोरोना की वजह से रोजगार ठप पड़ा है। निजी बस संचालकों वर्ष 2015 में किराया बढाया था, तब डीजल की दरें 52 रूपए प्रति लीटर के आसपास थी, लेकिन अब डीजल महंगा होने से इस व्यवसाय में नुकसान हो रहा है। इसलिए बसों का किराया भी बढाया जाए। एसोसिएशन ने कम से कम एक वर्ष का टैक्स माफ करने की मांग की है। इसके अलावा पुराने वाहनों में सीएनजी किट लगवाने के लिए बिना ब्याज ऋण देने की भी मांग की है। ज्ञापन में कहा है कि राज्य सरकार परिवहन निगम को वाहन चलाने के लिए 500 करोड़ रुपए देती है, जो कि औसत प्रति वर्ष 16 लाख रुपए प्रति वाहन पड़ता है। इसके अलावा सरकार बहुत सी सुविधाएं देती है। जबकि निजी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कोई छूट नहीं दी जाती है। निजी क्षेत्र के मुकाबले राज्य पथ परिवहन निगम को टैक्स भी कम देना पड़ता है।

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