जिन्होंने सेवा को ही बना लिया अपना जीवन का लक्ष्य

चित्तौडग़ढ़. कहते है कि मानव एवं मूक पशु सेवा से बड़ा कोई कार्य नहीं होता है। कुछ विरले ऐसे भी होते है जो सेवा को ही अपने जीवन का ध्येय बना लेते है। कोरोना काल में जहां एक ओर आदमी-आदमी से मिलने में डर रहा था वहीं दूसरी और चित्तौडग़ढ़ के कुछ लोग मानव एवं मूक पशुओं के दर्द को समझ कर उनकी सेवा में लग गए। ऐसे में जरूरतमंदों को भोजन ही नहीं कराया बल्कि निर्बाध्य रुप से उनकी हर जरूरत को पूरा करने का काम भी इन लोगों ने बखूबी निभाया।

By: Avinash Chaturvedi

Updated: 31 Jul 2020, 07:20 PM IST

चित्तौडग़ढ़. कहते है कि मानव एवं मूक पशु सेवा से बड़ा कोई कार्य नहीं होता है। कुछ विरले ऐसे भी होते है जो सेवा को ही अपने जीवन का ध्येय बना लेते है। कोरोना काल में जहां एक ओर आदमी-आदमी से मिलने में डर रहा था वहीं दूसरी और चित्तौडग़ढ़ के कुछ लोग मानव एवं मूक पशुओं के दर्द को समझ कर उनकी सेवा में लग गए। ऐसे में जरूरतमंदों को भोजन ही नहीं कराया बल्कि निर्बाध्य रुप से उनकी हर जरूरत को पूरा करने का काम भी इन लोगों ने बखूबी निभाया।
मूक पशुओं को पहुंचाया भोजन समाज के लिए बने प्रेरणा
चित्तौडग़ढ़ के अप्रवासी भारतीय प्रतापनगर निवासी रमेश चंचलानी कोरोना काल से पहले ही दुबई से यहां पहुंच गए और लोकडाउन में यही पर ही रहे। लॉकडाउन के दौरान ही जब उन्हें यह पता लगा कि दुर्ग पर हजारों की संख्या में पर्यटकों की आवाजाही नहीं होने से भूख से तड़प रहे है तो उन्होंने दुर्ग पर रहने वाले मूक पशुओं के लिए बाटी, रोटी एवं चारे की व्यवस्था की। स्वयं पिछले १५ वर्ष से लकवा ग्रसित है लेकिन सेवा के इस पुनित कार्य के लिए लगातार वे प्रतिदिन दुर्ग पर जाते और वहां पर बंदरों को बाटी, केला आदि पहुंचाते साथ ही दुर्ग पर रहने वाली गाया के लिए चारा पानी आदि की व्यवस्था की। यहीं नहीं कोरोना काल के दौरान कोई भूख ना सोये इसके लिए उन्होंने 500 से अधिक परिवारों में कच्ची खाद्य सामग्री भी पहुंचाई। चंचलानी के सेवा कार्य इतना ही नहीं ये वर्षो से विदेश में रहकर भी चित्तौडग़ढ़ में सेवा का कार्य कर रहे है। आपने अब तक शहर के जिला अस्पताल, चारों मोक्षधाम सहित आठ स्थानों पर वाटर कूलर लगा दिए है। आधा दर्जन से अधिक विद्यालयों को गोद ले रखा है जिसमें पढऩे वाले बच्चों को हर वर्ष पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवाने के लिए स्वयं बीस हजार कॉपियां तैयार करवाते है। राजकीय बालिका विद्याालय में करीब १५ लाख रुपए की लागत से एक सभागार, विद्याालय में सीसीटीवी कैमरे एवं बच्चों के लिए बड़ी स्क्रीन की टीवी आदि मुहैया करा चुके है। 2019 में यहां पर हुई राज्य स्तरीय बॉस्केटबाल प्रतियोगिता में करीब 7 लाख की लात से सात दिन तक टीमों के ठहरने, खाने आदि की व्यवस्था भी चंचलानी ने की। चंचलानी का कहना है कि आदमी अपने साथ क्या लाया है और क्या ले जाएगा। इसलिए जितना हो समाज की सेवा के लिए करना चाहिए।


समझा मानवता का दर्द
शहर के रेलवे स्टेशन एवं अन्य स्थानों पर रहकर जीवन यापन करने वाले परिवारों का दर्द शहर की एक संस्था साईं ऐस्ट्रो विजऩ सोसायटी के पदाधिकारियों को समझ में आया। इसी दर्द को समझ कर सोसायटी के अध्यक्ष संजय गील ने कोरोना को लेकर लगे लॉकडाउन में ऐसे परिवार वालों को भूखा नहीं सोने देने का संकल्प लिया। इसी कारण उन्होंने अपने टीम के अन्य सदस्यों से इस बात चर्चा करते हुए अपनी इच्छा जाहिर की। इसके बाद सभी ने गील की प्रेरणा से दोनों समय ऐसे करीब ४०० परिवारों को प्रतिदिन दोनों समय भोजन पहुंचाया ही नहीं उन्हें पूरे सम्मान के साथ भोजन करवाया। साथ ही कोरोना से बचाव के लिए उन्हें मास्क एवं सेनेटाइजर भी उपलब्ध करवाए। डॉ. संजय गिल ने बताया कि जब उन्होंने साईं ऐस्ट्रो विजऩ सोसायटी का गठन किया और चितौडग़ढ़ इकाई स्थापना की प्रारम्भिक स्तर पर जनकल्याण किये जा रहे थे। चुनोती इस बात की थी बडे लक्ष्य ओर कार्य प्रारंभ करना जितना आसान है वही इन कार्यो को निरंतर जारी रखना उतना ही मुश्किल। बहुत ही छोटी टीम जिसमे अध्यक्ष डॉ.संजय गील, हरदीप कौर, विपिन शर्मा, पुष्कर सोनी, सतपाल दुआ, चंद्रप्रकाश मालाणी, भगवान तड़बा आदि सम्मिलित थे जब एक सर्द रात को जरूरतमंदों को कम्बल वितरित कर रहे थे तो पाया कि सर्दी के कहर से ज्यादा दर्द भूखे पेट सोना है । इसी से एक संकल्प के साथ प्रारंभ हुआ जरूरतमंदों के लिए नि:शुल्क भोजन उपलब्ध कराने का महाअभियान । कोरोना संकट की विपरीत परिस्थितियों में जन सेवा का अवसर मिला और सोसायटी द्वारा साईं प्रसादम ने स्थानीय जन के दिलों में जगह ऐसी बनाई की आज 700 से अधिक मेवाड़वासी समर्पण और सहयोग की भावना के साथ जुड़ चुके है और एक कारवाँ बन चुका है।वर्तमान में सोसायटी द्वारा रक्तप्रदाता समूह, अनाथों को सम्बल और सहायता, नि:शुल्क ज्योतिष परामर्श, नि:शुल्क भोजन, गीत संगीत में नवोदित प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने के साथ ही नारी पुनरुत्थान, पर्यावरण संरक्षण आदि कार्य भी किये जा रहे है।

Avinash Chaturvedi
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