तीन साल बाद तीन सौ बीघा में ककड़ी

चित्तौडग़ढ़. भदेसर. धनेश्वर महादेव के गंगारिया तालाब में ककड़ी व खरबूजे की 200 बीघा की फसल व भदेसर के हमेर सागर तालाब में 100 बीघा क्षेत्र में यही फसल पकने को तैयार हो गई। तीन वर्ष बाद इन तालाबों के पेटे से पानी खाली होने से इस वर्ष किसान बुवाई कर पाए हैं।

By: Avinash Chaturvedi

Published: 25 Apr 2021, 09:21 AM IST

चित्तौडग़ढ़. भदेसर. धनेश्वर महादेव के गंगारिया तालाब में ककड़ी व खरबूजे की 200 बीघा की फसल व भदेसर के हमेर सागर तालाब में 100 बीघा क्षेत्र में यही फसल पकने को तैयार हो गई। तीन वर्ष बाद इन तालाबों के पेटे से पानी खाली होने से इस वर्ष किसान बुवाई कर पाए हैं।
जानकारी के अनुसार धनेश्वर महादेव का गंगारिया तालाब खरबूज की मिठास भरी पैदावार के लिए अनोखा है। इस तालाब में पिछले कई वर्षों से किसान पेटा कास्त के रूप में ककड़ी व खरबूजे तथा तरबूजों की बुवाई करते आ रहे है। हालाकि तरबूज यहां की पैदावार कम होने के कारण अब धीरे धीरे किसान बहुत ही कम क्षेत्रफल में बुवाई करने लगे लेकिन खरबूजे की बुवाई तो यहां पर कभी भी कम नहीं हुई हैं। तीन वर्ष पहले यह तालाब भर चुका था तथा लगभग 400 बीघा क्षेत्र में पानी भरा हुआ था। दो वर्ष पहले किसानों ने इस पानी को नहरों में छोडऩे अथवा मोरी के माध्यम से निकालने से मना कर दिया इसकी परिणति यह हुई कि कहारों की ढाणी के कहार परिवारों ने यहां पर ढाई सौ बीघा क्षेत्र में सिंघाड़े की बुवाई की थी। सिंघाड़े की फसल तैयार हो जाने के बाद धीरे धीरे तालाब खाली होने से तरककड़ी की बुवाई की थी। इसके बाद खरबूजों की बुवाई शुरू कर दी। कहारों की ढाणी के 20 से 25 परिवार इन दिनों इस फसल के रखरखाव में लगे हुए हैं। यहां तैयार हुई ककड़ी इन दिनों मंडियों तथा आसपास के गांवों के बाजारों में खूब बिक रही हैं जबकि खरबूजे अभी 15 दिन बाद पक कर तैयार होंगे। इसके बाद मंडी में जाएंगे।

मिठास में पहचान
गंगारिया तालाब में बुवाई किए गए खरबूजा की जिले के मंडियों में अलग ही पहचान है। यहां के किसानों का कहना है कि इस तालाब में पहाड़ों और जंगलों से आने वाले देसी खाद के कारण खरबूजों में शक्कर के मुकाबले मिठास होती है। मंडियों में यह खरबूजे हाथों हाथ बिक जाते हैं।

क्या कहते हैं किसान
माधवकहार का कहना है कि अगर लॉक डाउन नहीं लगता है तो ककड़ी व खरबूजे बुवाई करने वाले किसानों के लिए यह सीजन लाभकारी साबित हो सकता है वहीं भंवर लाल तथा भूरा कहार का कहना है कि गंगारिया तालाब समय से भर जाए तथा समय से खाली हो जाए तो किसानों को दोहरी फसल जिसमें सिंघाड़ा व खरबूजे दोनों की बुवाई हो सकती है।

ठेके पर भी बुवाई
कहारों की ढाणी के कहार जाति के किसानों के पास तालाब में कृषि भूमि बहुत कम है ऐसी स्थिति में दूसरे किसानों से भूमि ठेके पर भी ली जाती है।

पानी को सहेजने की उपयोगिता
गंगारिया तालाब में लगातार दो वर्ष पानी रहने का परिणाम यह हुआ कि आज पेटा क्षेत्र के अधिकांश कुओं में भरपूर पानी है तथा पानी की बदौलत ही यह किसान ककड़ी व खरबूजो की फसल की सिंचाई कर रहे हैं। अबकी बार भदेसर के हमेर सागर तालाब भी खाली हो चुका है यहां पर भी खरबूज की भरपूर बुवाई की है। कहारों की ढाणी के किसानों ने यहां पर ठेके पर 100 बीघा क्षेत्र में खरबूजे की बुवाई की है।
तीन वर्ष बाद बुवाई
गंगारिया तालाब पेटाकास्त के अलावा डेढ़ सौ से 200 बीघा जमीन निजी खातेदारी भी है पिछले 3 वर्षों से लगातार तालाब में पानी भरे रहने के कारण किसान तीनों में से एक भी फसल नहीं ले पाए थे। इस वर्ष तालाब में पानी नहीं आने से समय से पहले ही तालाब सूख गए। इससे 3 वर्ष में पहली बार किसानों को अपनी कृषि भूमि से लाभ होगा।

Avinash Chaturvedi
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