वट सावित्री व्रत व शनि जयंंती कल, नहीं होगा ग्रहण का साया

वट सावित्री और शनि जयंती पर दस जून को ग्रहण का साया नहीं होगा। इस दिन सूर्य ग्रहण है, लेकिन यह भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा।

By: jitender saran

Published: 09 Jun 2021, 10:52 AM IST

चित्तौडग़ढ़
कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय कुमार तिवारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दस जून को सूर्य ग्रहण भी है और यह कंकडाकृति में है। धर्मशास्त्रों के अनुसार यदि ग्रहण दिखाई ना दे तो उसका सूतक आदि दोष मान्य नहीं होते है। 10 जून को अमावस्या है और वट सावित्री व्रत में वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा करने का विधान है। भारतीय संस्कृति मे पांच वट वृक्षों का महत्व अधिक ह,ै जिनमें अक्षय वट, पंचवट, वंशीवट, गयावट और सिद्धवट का उल्लेख है। जिनकी प्राचीनता के बारे में कोई नहीं जानता। संसार में इन पांच वटों को ही पवित्र वट की श्रेणी में रखा गया है। प्रयाग में अक्षय वट, नासिक में पंचवट, वृंदावन में वंशीवट, गया में गयावट और उज्जैन में पवित्र सिद्धवट है। भविष्योत्तर पुराण के अनुसार वट के वृक्ष ने सावित्री के पति सत्यवान के मृत शरीर को अपनी जटाओं के घेरे में सुरक्षित रखा था, ताकि जंगली जानवर शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा सके। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास होता है, इसलिए भी महिलाएं इस वृक्ष की विशेषकर पूजा करती हैं। स्कंद पुराण तथा भविष्योत्तर पुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को यह व्रत करने का विधान है, वहीं निर्णया मृत आदि के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या को यह व्रत करने की बात कहीं गई है। यह पूजन महिलाएं सौभाग्य की प्राप्ति और पति की लंबी आयु की कामना को लेकर करती हैं। इसी दिन शनि जयंती होने से विशेष संयोग भी बन रहा है। शनि न्याय के देवता है और आयु के प्रदाता भी है, इसीलिए इस व्रत का महत्व अधिक हो जाएगा।

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