सोशल मीडिया पर वायरल बंधक बनाने का मामला 85 लाख के लेनदेन का निकला

चित्तौडग़ढ़ जिले के निम्बाहेड़ा में शनिवार को एक इंजीनियर को परिवार सहित बंधक बनाने को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए ट्वीट से हड़कंप मच गया, लेकिन पुलिस मौके पर पहुंची तो सबकुछ सामान्य होकर मामला ८५ लाख रूपए के लेनदेन का निकला।

By: jitender saran

Published: 07 Mar 2020, 11:03 PM IST

चित्तौडग़ढ़
जानकारी के अनुसार मूलत: उत्तरप्रदेश निवासी आदेश कुमार तिवारी निम्बाहेड़ा में एलएनटी कंपनी में इंजीनियर के पद पर कार्यरत है। निम्बाहेड़ा निवासी विक्रम आंजना इसी कंपनी में ठेकेदार है। शनिवार को आदेश कुमार अपने परिवार सहित कंपनी के एक अन्य कर्मचारी नवीन नडीवाल के साथ होली पर्व पर अपने गांव जा रहे थे। इधर ठेकेदार विक्रम आंजना के कंपनी में करीब ८५ लाख रूपए का भुगतान बकाया चल रहा है, इस भुगतान के लिए उसने कई बार आदेश कुमार से कहा, लेकिन कंपनी ने भुगतान नहीं किया। ठेकेदार आंजना को शनिवार को पता चला कि होली पर आदेश तिवारी अपने गांव जा रहे हैं तो वह भी अपने कुछ साथियों को लेकर एक अपार्टमेंट में स्थित आदेश के मकान के बाहर पहुंच गया और भुगतान करवाने के बाद ही गांव जाने की बात कही। इस बात को लेकर आदेश कुमार तिवारी के भाई अमित तिवारी ने अपने ट्वीटर अकाउंट से आदेश का बीवी-बच्चों सहित अपहरण कर बंधक बना लेने की बात ट्वीट कर दी। यह ट्वीट मुख्यमंत्री कार्यालय सहित बड़े अधिकारियों और नेताओं तक पहुंचने के बाद खलबली मच गई। निम्बाहेड़ा कोतवाली थाने से सहायक उप निरीक्षक कैलाश शर्मा मय पुलिस जाप्ते के उस अपार्टमेंट में पहुंचे, जहां आदेश कुमार तिवारी परिवार सहित रहते हैं। वहां पहुंचने पर अपहरण और बंधक बनाने का मामला झूठा निकला। मौके पर मौजूद ठेकेदार विक्रम आंजना ने पुलिस को बताया कि ८५ लाख रूपए के लेनदेन का मामला है। पुलिस पूछताछ में जो कहानी सामने आई, उसके अनुसार विक्रम आंजना ने निम्बाहेड़ा की एक सीमेंट कंपनी में चल रहे एलएनटी कंपनी के प्रोजेक्ट लाइन एक व लाइन दो व अन्य प्रोजेक्ट में ठेकेदारी का काम किया था। जिसका करीब ८५ लाख रूपए का भुगतान बकाया चल रहा है। ठेकेदार एलएनटी कंपनी के प्लानिंग मैनेजर आदेश कुमार से लगातार भुगतान करवाने को कह रहा था, लेकिन भुगतान नहीं किया जा रहा है। इस बीच आदेश कुमार होली के अवकाश में परिवार सहित कंपनी के एक अन्य कर्मचारी नवीन नडीवाल के साथ अपने घर जा रहा था। यह बात विक्रम को पता चली तो वह अपने साथियों के साथ आदेश के मकान के बाहर पहुंच गया और यहीं पर रूककर उसका भुगतान करवाने की बात उसने आदेश कुमार से कही। इस बात को लेकर इंजीनियर के भाई अमित तिवारी की ओर से सोशल मीडिया पर इसे अपहरण और बंधक बनाने का रंग देने से हड़कंप मच गया। बाद में दोनों पक्षों को कोतवाली बुलाया गया, जहां बाकियात के भुगतान को लेकर दोनों पक्षों में समझौता हो गया। इस संबंध में किसी भी पक्ष ने थाने में रिपोर्ट नहीं दी है।
एक ही नाम से हो गया भ्रम
इस मामले में सोशल मीडिया पर विक्रम आंजना को कांग्रेस नेता और सहकारिता मंत्री का रिश्तेदार बता दिया गया, लेकिन बाद में खुलासा हो गया कि जिस कांग्रेस नेता के बारे में सोशल मीडिया पर प्रचारित किया गया, वह विक्रम आंजना कोई अन्य था। एक ही नाम होने से एक बारगी तो भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। सोशल मीडिया पर हुए गलत प्रचार के चलते कांग्रेस नेता विक्रम आंजना को बेवजह परेशानी का सामना करना पड़ गया।

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