लॉक डाउन में सब्जियों पर भी वायरस का हमला

कोरोना की मार से निपटने के लिए लगाए गए लॉक डाउन ने जहां किसानों की कमर तोड़ दी हैं, वहीं अब जिले में कीट व्याधि से बीमार हुई सब्जियों ने भी किसानों की मुश्किलें बढा दी है। एक तरफ जहां किसानों को सब्जियों के वाजिब दाम नहीं मिल रहे हैं, वहीं कीट प्रकोप से सब्जियों में नुकसान झेलना पड़ रहा है।

By: jitender saran

Published: 09 Jun 2021, 08:59 AM IST

चित्तौडग़ढ़
जिले में मूंग, उडद, ग्वार, भिण्डी, लोकी, तरोई, करेला आदि में भी तरह तरह के कीट और रोग पनप गए हैं। हालांकि अब तक कीट प्रकोप प्रारम्भिक चरण में हैं, लेकिन पूरे जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में सब्जियों में रोग पनपने से किसानोंं के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। कोरोना महामारी में कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतन लाल सोलंकी के अनुसार सब्जियों में मुख्यत पीतशीरा, मोजेक विषाणु जनित रोग फैल रहा है। यह रोग सफेद मक्खी से फैलता है। इसमें पत्तियां व फल पीले पड़ जाते हैं। पत्तियांं चितकबरी होकर प्यालेनुमा हो जाती हैं। इसके नियत्रंण के लिए खेत में रोग की शुरुआत में ही रोग ग्रस्त पौधोंं को जड़ सहित उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिए। नीम तेल पांच मिली प्रति लीटर की दर से छिड़काव करना चाहिए। एसीटार्मिप्रड कीटनाशी 0़5 ग्राम प्रति लीटर पानी दर से छिड़काव करने की भी सलाह दी गई है।
जड़ गलन रोग में खड़ी फसल में बाविस्टिन दवा का दो ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव तथा चार ग्राम लीटर की दर से डेचिंग करने को कहा गया है। छाछया रोग में पत्तियों पर सफेद धब्बे दिखाई देते हैं तथा अधिक रोग ग्रसित पत्तियां पीली पड़कर झड़ जा रही हो तो केराथेन दवा का एक मिली प्रति लीटर की दर से घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

लाल मकड़ी से यूं करें बचाव
किसानों को सलाह दी गई है कि लाल मकड़ी आठ पैंरो वाला कीट है जो अपने तीखे मुखांगो से पौधों की पत्तियों का निचली सतह से रस चूसते हैं। इस पर नियत्रंण के लिए क्योनोलफॉस 25 ई.सी. का दो मि.ली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है।

फल मक्खी का भी प्रकोप
उद्यान विशेषज्ञ डॉ. राजेश जलवानिया ने बताया कि इन दिनों खीरा, तुरई, लोकी, करेला, खरबुजा, ककड़ी आदि में फल मक्खी का प्रकोप देखा गया है। इसके आक्रमण से फल काणें हो जाते हैं, जिससे किसानों को उचित दाम नहीं मिल पाता है। इस पर नियंत्रण के लिए रोग ग्रस्त फलों को तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए। साथ ही प्रोपेनोफॉस 50 ई.सी. का 1 मिली /लीटर की दर से छिड़काव किया जाना चाहिए। अवाश्यकता के अनुसार दस-पन्द्रह दिन में छिड़काव को दोहराना चाहिए।

मूंग व उड़द के लिए यह उपाय
मूंग व उड़द के पौधों में पीलापन मोजेक बीमारी की वजह से होता हैं जो एक विषाणु जनित बीमारी है। इसकी शुरुआत एक पौधे से होती है, फिर धीरे धीरे पूरे खेत में फैलता है। इस पर नियत्रंण के लिए बीजों को इमिडाक्लोप्रिड 70 डब्ल्यूएस 3 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीज उपचार कर बुआई करनी चाहिए।

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