खदानों में किस लिए छा गया छा गया सन्नाटा

श्रमिकों को सता रही रोजगार की सता रही चिंता
-एनजीटी के आदेश के बाद बंद हुई मानपुरा क्षेत्र की 292 खदानें
- प्रकरण की २८ को होने वाली सुनवाई में होगा आगे का फैसला


चित्तौडग़ढ़. राष्ट्र्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) नई दिल्ली की प्रधान बैंच के आदेश के बाद चित्तौडग़ढ़ के मानपुरा क्वारी क्षेत्र में २९२ खाने गुरूवार को बंद कराने के बाद शुक्रवार को खनन क्षेत्र में सन्नाटा पसरा दिखा। इससे करीब दस हजार लोगो के समक्ष रोजगार का संकट आ गया है। इनमें खान मालिकों के साथ श्रमिक व होटल, परिवहन आदि से अप्रत्यक्ष रोजगार पाने वाले लोग भी शामिल है। एनजीटी के आदेश के बाद खान विभाग ने गुरूवार को दिन भर विधिक प्रक्रिया पूरी कर खाने बंद कराई। खान विभाग ने दावा किया है कि आदेश में शामिल सभी २९२ खानों में खनन कार्य बंद करा दिया गया है। बंद हुई खदाने फिर शुरू हो पाएगी या नहीं इस बारे में अब २८ फरवरी को सुनवार्ई के बाद ही तय होगा। एनजीटी प्रधान बैंच के न्यायाधीश राघेवन्द्रसिंह राठौड़ एवं विशेषज्ञ सदस्य सत्यवान सिंह ने १२ फरवरी को प्रतापभानु सिंह शेखावत बनाम खान व भूविज्ञान विभाग राजस्थान मामले में सुनवाई करते हुए इन खदानों को बंद कराने का आदेश दिया था। आदेश की पालना में शपप पत्र के साथ २८ फरवरी को होने वाली सुनवाई में विभाग के अतिरिक्त निदेशक को मौजूद रहना होगा।

लाल रंग से चिह्नित किया सीमा रेखा को
एनजीटी ने सुनवाई के दौरान सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के आधार पर मानपुरा क्वारी लाइसेंस क्षेत्र को नगर परिषद क्षेत्र मानकर २९२ खदाने बंद करने काआदेश जारी किया। खनि अभियन्ता सत्यनारायण शर्मा के अनुसार रिपोर्ट के अनुसार क्वारी क्षेत्र मानपुरा में नगर परिषद की सीमा रेखा को मौके पर लाल रंग से चिह्नित किया गया। इस सीमा के दायरे में आने वाली प्रभावशील क्वारी लाइसेंस क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से सभी खनन गतिविधियां बंद करा दी गई है। मानपुरा में बंद कराई गई २९२ खदानों में खण्डे व इमारती पत्थर निकलता है। ये पत्थर राज्य के विभिन्न जिलों सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में भी निर्माण कार्य के लिए जाता है। चित्तौडग़ढ़ में कई प्राचीन इमारते भी इसी मानपुरी पत्थर से बनी हुई है।

मजदूरों को तलाशना होगा नया रोजगार
मानपुरा क्षेत्र की खदाने क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए रोजगार का प्रमुख आधार थी। इनको अभी बंद कर देने से खदानों में कार्यरत श्रमिकों के लिए नया रोजगार तलाशना चुनौती बन गया है। मानपुरा पत्थर उत्पादक समिति के अध्यक्ष गुमानसिंह ने बताया कि एनजीटी में इस प्रकरण में २८ फरवरी को होने वाली सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों के समक्ष अधिवक्ताओं के माध्यम से अपना पक्ष रखा जाएगा। इसके माध्यम से बताया जाएगा कि मानपुरा नगर परिषद क्षेत्र में नहीं आता है एवं यहां होने वाले खनन से किसी को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यहां मशीनों से खनन की बजाय अधिकतर खनन छैनी व हथोड़ो के माध्यम से होता है।

बंद करा दिया है खदानों को
एनजीटी के आदेश के अनुसार जिस क्षेत्र में खदाने बंद कराने के लिए कहा गया था वहां सभी २९२ खदानों को बंद करा दिया गया है। कार्यालय के तकनीकी स्टॉफ को निर्देश दिए गए है कि क्षेत्र में नियमित एवं आकस्मिक चैकिंग कर एनजीटी के आदेश की पालना सुनिश्चित करें।
सत्यनारायण शर्मा, खनिज अभियन्ता, चित्तौडग़ढ़

Nilesh Kumar Kathed Bureau Incharge
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