इस बीजेपी नेता ने क्या कहा, जिससे हो गया प्रदेश में हंगामा

माहेश्वरी होना बताने पर नोडल अधिकारी को कपासन नगर पालिका चेयरमैन दिलीप व्यास ने बैठक से बाहर निकाल दिया

By: manish gautam

Published: 20 Jan 2018, 10:07 PM IST

चित्तौडग़ढ़.

कपासन पंचायत समिति सभागार में उपखंड मुख्यालय पर गणतंत्र दिवस समारोह तैयारी के लिए शुक्रवार को बुलाई गई बैठक में नगरपालिका अध्यक्ष दिलीप व्यास ने नोडल अधिकारी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य सुभाष माहेश्वरी को बाहर निकाल दिए जाने का मामला शनिवार को तुल पकड़ गया।

 

समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि व्यास ने बैठक में पहुंचते ही कहा कि इस बैठक में अगर कोई माहेश्वरी हो तो बाहर चले जाए और मैं ऐसी किसी बैठक में भाग नही लूंगा जिसमे कोई भी माहेश्वरी बैठा हो।

 

 

निकाला जुलूस, कलक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन

 

पालिकाध्यक्ष व्यास के रवैये से खफा माहेश्वरी समाज, माहेश्वरी नवयुवक व महिला मंडल के तत्वावधान में सैकड़ों लोगों ने सुबह कपासन में मुख्य मार्गों से मौन जुलूस निकाल उपखण्ड कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। लोगों ने आरोप लगाया कि पालिकाध्यक्ष ने समाज के व्यक्ति के साथ बदसलूकी करने के साथ समाज के लिए अपशब्दों का भी उपयोग किया।

 

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थी। एसडीएम के नाम पालिकाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन दिया गया। समाज के लोगों ने चित्तौडग़ढ़ जिला मुख्यालय पर पहुंचकर भी प्रदर्शन किया। कपासन से आए समाज के लोगों का साथ देने के लिए चित्तौडग़ढ़ जिला माहेश्वरी सभा, माहेश्वरी युवा संगठन, माहेश्वरी महिला संगठन के सदस्य भी पहुंच गए। यहां कलक्ट्रेट पर मानव श्रृंखला बना प्रदर्शन करने के साथ पालिकाध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।

 

 

अब भाजपा की कमेटी करेगी जांच

 

भाजपा जिलाध्यक्ष रतनलाल गाडरी ने कपासन नगर पालिका अध्यक्ष दिलीप व्यास के खिलाफ माहेश्वरी समाज द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद मामले की जांच के लिए पार्टी स्तर पर कमेटी गठित की है। भाजपा जिला महामंत्री बगदीराम धाकड़, देवीसिंह राणावत, उपाध्यक्ष कन्हैयादास वैष्णव, ललित शारदा, उपसभापति भरत जागेटिया, मण्डल महामंत्री राकेश नुवाल, अनिल ईनाणी, पुर्व जिला महामंत्री प्रदीप लढ्ढ़ा व जिला कार्यालय प्रमुख शेखर शर्मा शामिल है।

 

 

स्वयं बाहर जाने की इच्छा जताई थी

 

इधर पालिकाध्यक्ष दिलीप व्यास का कहना है कि मैं विद्यालय के गिरते शैक्षणिक स्तर, बोर्ड परीक्षा के घटिया परिणाम व वहां फैल रहे भ्रष्टाचार के कारण प्रधानाचार्य माहेश्वरी से व्यथित था। मैने माहेश्वरी को बाहर नहीं निकाला, बल्कि स्वंय बाहर जाने की इच्छा जताई थी।

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