हौंसलों के बल पर भर रहे सफलता की उड़ान

जब मन में कुछ पाने ही तमन्ना हो तो फिर राहों में चाहे कितनी भी बाधा आए वो मंजिल पाने से रोक नहीं सकती है।

By: Kalulal

Updated: 03 Dec 2019, 11:08 PM IST

विश्व दिव्यांग दिवस आज (World Divyang Day today) दिव्यांग बच्चे सफलता पाकर बन गए प्रेरणा
चित्तौडग़ढ़. जब मन में कुछ पाने ही तमन्ना हो तो फिर राहों में चाहे कितनी भी बाधा आए वो मंजिल पाने से रोक नहीं सकती है। चित्तौडग़ढ़ जिले में कई ऐसे प्रेरेक उदाहरण है जिनमें शारीरिक रूप से कुछ कमी रह जाने वालों ने हौंंसला नहीं छोड़ा व कड़ी मेहनत के साथ मंजिल की तरफ बढ़ते गए। ऐसी दिव्यांग प्रतिभाओं ने दर्शाया की हौंसला बुलंद हो तो सफलता मिलने से कोई नहीं रोक सकता। जिले में कई बच्चे दिव्यांग होने के बाद भी अपनी प्रतिभा के दम पर पहचान बना रहे है।

मानों मोबाइल ने लौटा दी रोशनी
राजकीय शहीद मेजर नटवरङ्क्षसह स्कूल में कक्षा सात में पढऩे वाले प्रशांत सुथार बचपन से नेत्रहीन है। प्रशांत के पिता मोहनलाल एसी मैकेनिक है। प्रशांत ने बताया कि वह अपनी कक्षा में टीचर के पढ़ाने के दौरान सुनते है। उसके बाद उनके घर पर उनकी बहन भी पढ़ाई में मदद करती है। तीन साल पहले उसे मोबाइल चलाने की ट्रेनिंग की दी गई। ट्रेनिंग के बाद प्रशांत अब मोबाइल ऐसे चलाते है जैसे वह सामान्य व्यक्ति हो। प्रशांत ने बताया कि मोबाइल चलाना सिखने के बाद वह उसकी जीवन में काफी बदलाव आया है। मोबाइल की सहायता से उसे पढ़ाई करने में आसानी हुई है वह अब पढऩे के साथ अन्य जानकारियां भी आसानी से जुटा लेता है।
चित्रों से जाहिर हो जाते मन के भाव
बारेदा स्कूल में कक्षा आठ में पढऩे वाली मूकबधिर अनुश्री गोस्वामी के पिता के नौ वर्ष पहले निधन के बाद माता रामीबाई उसका पालन पोषण करती है। रामीबाईउसी स्कूल में पोषाहार बनाने का काम करती है। अनुश्री बोरदा स्कूल में सामान्य बच्चें के साथ पढ़ रही है। उसके सुन नहीं पाने से स्कूल मे विशेष शिक्षक नहीं होने से पढ़ाने में परेशानी होती है लेकिन उसकी प्रतिभा को देख कोई भी उसे पढ़ाने से अपने आप को रोक नहीं पाता है। अनुश्री चित्रकला में काफी प्रतिभावान है कई बार तो यह अन्य बच्चों के चित्र बनाती है।

Kalulal Reporting
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