आखिर भगवान गणेश ने पेट अंदर क्यों धंसाया...

जिले के गांव गोपालपुरा स्थित द्रोणगिरि की पहाडिय़ों की तलहटी में बसे गांव डूंगरास आथूणा में करीब 4 सौ 31 वर्ष पुराना मां कालीका का मंदिर।

By: Madhusudan Sharma

Published: 11 Oct 2021, 09:57 AM IST

चूरू. जिले के गांव गोपालपुरा स्थित द्रोणगिरि की पहाडिय़ों की तलहटी में बसे गांव डूंगरास आथूणा में करीब 4 सौ 31 वर्ष पुराना मां कालीका का मंदिर। इस मंदिर की खासियत यह है कि एकमात्र दक्षिणमुखी मंदिर है जहां मां कालिका विराजमान है। मंदिर में मां के दर्शन के लिए पहाड़ी पर बनीं 5 सौ 51 सीढिय़ां चढऩी पड़ती है। तब कहीं जाकर मां- बेटे के दर्शन श्रद्धालुओं को होते हैं। सपाट पहाड़ी पर एक ही पत्थर को तराश कर 3 भाग में 5 फीट ऊंचा मां कालिका का दक्षिणमुखी मंदिर है। ठीक इसके सामने 5 फीट ऊंचा बाल गणेश का मंदिर बना है। मंदिर कब बना ? किसने बनाया इसे लेकर पुजारी कमलेश शर्मा ने बताया कि मंदिर पर लगे शिलालेख पर अंकित तिथि के अनुसार यह विसं 16 46 में बनाया गया था। किसने बनाया इसे लेकर किसी के पास कोई सही जवाब नहीं मिला। गांव के हनुमान सिंह ने बताया कि देवी भगवती का दक्षिण मुखी यह पहला मंदिर है। ऐसे ही बाल स्वरूप में भगवान गणेश का भी उत्तर दिशा की ओर प्रवेश द्वार वाला यह अनूठा मंदिर है। उन्होंने बताया कि इसके पीछे दंतकथा यह है कि मां कालिका के रौद्र रूप को शांत करने के लिए बेटे गणेश ने अपना पेट अंदर धरसा लिया था। इसीलिए इस मंदिर में गणेश जी की मूर्ति पेट अंदर धंसी हुई है।
चोर स्वर्णद्वार ले जाने लगे तो गणेश जी ने पहाड़ी धंसा दी
मंदिर के बारे में कई किस्से- कहानियां हैं प्रचलित है। मंदिर परिसर में मौजूद ग्रामीण सुल्तान सिंह व राजेन्द्र सिंह ने बताया कि पूर्व में दोनों मंदिरों में सोने के दरवाजे लगे थे। जिन्हें चोर ले जाने लगे तो मां काली ने गणेश को आदेश दिया उन्हें रोकने के लिए। जिस पर गणेश जी ने अपनी एड़ी की चोट से पहाड़ी को धंसा दिया। सारे चोर उसके नीचे दबकर मर गए । वहीं पहाड़ी तीन हिस्सों में बंट गई, जो आज भी माताजी की डूंगरी, बिनाक्या व स्यालिया की डूंगरी के नाम से मौजूद है।

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Madhusudan Sharma Bureau Incharge
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