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कुदरत ने पिता के बाद छीना मां का आंचल, मोहल्ले के लोगों ने की अंतिम संस्कार के सामान की व्यवस्था

Churu News: कुदरत भी यहां बड़ी बे-दर्द निकली। पिता की गोद के बाद मां का आंचल भी छीन लिया। मोहल्ले के लोगों ने मां के अंतिम संस्कार के सामान की व्यवस्था करने के साथ 12 दिन के लिए रसोई का कुछ सामान डलवा दिया, लेकिन आगे इन दोनों बच्चों का सहारा कौन बनेगा…? इसका किसी के पास जवाब नहीं है।

चुरूJun 06, 2024 / 01:34 pm

Santosh Trivedi

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Churu News: कुदरत भी यहां बड़ी बे-दर्द निकली। पिता की गोद के बाद मां का आंचल भी छीन लिया। अब ना उनकी आंख में आंसू है और ना ही ख्वाब। चिंता है तो बस दो जून की रोटी की। कौन करेगा रोटी का जुगाड़। कैसे होगा हमारा लालन-पालन। उनकी तो घर आने-जाने वालों से कुछ कहने और मांगने तक की हिम्मत नहीं है।
यह दर्दभरा दृश्य है शहर के वार्ड 39 मनोरंजन क्लब के पीछे​ स्थित एक मकान का। दो बच्चों के पिता गिरधारीलाल वर्मा की तीन वर्ष पहले कोरोना की दूसरी लहर में मौत हो गई। लेकिन मां ने अपने बच्चों की जिम्मेदारी संभाली। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही उनकी मां मीना देवी की बुधवार को हुई मौत से उसके दोनों बेटे नितिन 17 वर्ष और लक्की 14 वर्ष के सारे ख्वाब ही जमींदोज हो गए।
मोहल्ले के लोगों ने मां के अंतिम संस्कार के सामान की व्यवस्था करने के साथ 12 दिन के लिए रसोई का कुछ सामान डलवा दिया, लेकिन आगे इन दोनों बच्चों का सहारा कौन बनेगा…? इसका किसी के पास जवाब नहीं है।
मोहल्ले के पवन चौहान ने बताया कि इस परिवार पर संकट का दौर कोरोना की दूसरी लहर में शुरू हुआ। मजदूरी कर अपने दो बच्चों का पालन कर रहे गिरधारीलाल की कोरोना संक्रमण के दौरान आक्सिजन की कमी से मौत हो गई।
परिवार में कोई जागरूक सदस्य नहीं होने के कारण परिवार को कोई सरकारी सहायता नहीं मिल पाई। इसी बीच उनकी पत्नी मीना देवी के भोजन की नली में कैंसर का पता चला। इसके बाद यह परिवार टूट सा गया।
मोहल्ले व समाज के लोगों ने उनके उपचार में सहयोग किया। लेकिन उनको नहीं बचाया जा सका। मीना देवी की ज्यादा तबीयत खराब होने पर उन्हें बुधवार को डीबी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका निधन हो गया।

अब घर में बचे हैं दो बेटे

गिरधारीलाल और मीना देवी की मौत के बाद उनके घर में अब उनके दो बेटे बचे हैं। इनमें से नितिन 17 और छोटा लक्की 14 वर्ष का है। पिता की मौत के बाद घर की आर्थिक हालत खराब होने पर नितिन खेलने-कूदने और पढ़ने की उम्र में शहर में एक कपड़े की दुकान में नौकरी करने लगा। वहां उसे छह हजार रुपए मिलते हैं। वहीं उससे छोटा लक्की अभी सरकारी स्कूल में आठवीं कक्षा में पढ़ रहा है।

कौन उठाएगा इन बच्चों की जिम्मेदारी?

पिता के बाद मां की मौत होने पर मोहल्ले व आसपास के लोग उनके घर पर एकत्र हो गए। चलावे के साथ रसोई के कुछ सामान की भी व्यवस्था की गई। कुछ रिश्तेदार भी घर पर पहुंचे। पत्रिका टीम रात को उनके घर पहुंची तो इन बच्चों के भविष्य का जिम्मा लेने वाला वहां कोई नहीं था। यह परिवार लम्बे समय से बिना खिड़की वाले एक कमरे के घर में गुजारा कर रहा है। सहयोग में मिला रसोई का सामान भी सीढि़यों के नीचे ही रखा था।

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