Big Fraud: एक डॉक्टर दो-दो शिविरों में ! यह कैसे हो सकता है...लेकिन हुआ

Big Fraud: सरदारशहर सीएचसी नसबंदी में महिला की मौत के बाद नए खुलासों की श्रृंखला में यह ताजा खुलासा है।

By: Brijesh Singh

Published: 23 Aug 2020, 11:12 AM IST

चूरू. एक महीने 20 दिन बाद आखिर मैना की आत्मा को थोड़ा सुकून जरूर मिला होगा, जब उसकी मौत के लिए जिम्मेदार मानी जा रही लापरवाह एनजीओ के पांच लोगों को पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि , इन सबके बीच नित हो रहे खुलासों से पूरे मामले में गंभीर किस्म के घालमेल और पर्यवेक्षण के स्तर पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी साफ नजर आती है। पूरे मामले में अब एक नया मोड़ आया है, जिसमें यह बात सामने आ रही है कि सीएचसी सरदारशहर में जिस शिविर में आठ नसबंदी करने वाले डॉ. के. एल. चावड़ा की मौजूदगी दिखाई गई है, ठीक उसी दिन यही डॉ. के. एल. चावड़ा नाम का शख्स नागौर में भी एक शिविर में नसबंदी ऑपरेशन करता हुआ दिखाया गया है। हालांकि, इस तथ्य की अभी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है।

टीम के दूसरे डॉक्टर की भूमिका पर पहले ही उठ चुके हैं सवाल
गौरतलब है कि इससे पहले डॉ. के. कुमावत की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं, जो कि एनजीओ की टीम में उस दिन सर्जन के रूप में मौजूद दिखाए गए थे। हालांकि, यह भी काबिलेगौर है कि करीब 42 दिन तक पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और खुद मामले की जांच कर रही चिकित्सकों से युक्त प्रशासनिक कमेटी को सर्जन के नाम पता नहीं थे, क्योंकि नसबंदी शिविर की केस शीट ही गायब थीं। दरअसल, मृतका मैना देवी के मुआवजे के संबंध में जो प्रोफार्मा 13 सामने आया था, उसमें डॉ. के कुमावत के नाम के आगे जो रजिस्ट्रेशन नंबर दिया गया था, वह आरएमसी यानी राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रिकार्ड से मेल नहीं खा रहा था।

सीएचसी परबतसर का नाम यूं आया सामने
ताजा जानकारी के मुताबिक, अपुष्ट रूप से खबर मिल रही है कि इस शिविर में टीम में दिखाए गए दूसरे सर्जन यानी डॉ. के एल चावड़ा को नागौर जिले के परबतसर में ठीक उसी दिन सीएचसी पर आयोजित नसबंदी शिविर में नसबंदी करते हुए दिखाया गया है। गौरतलब है उसी दिन सीएचसी सरदारशहर में इसी डॉ. के एल चावड़ा के नाम पर आठ नसबंदी ऑपरेशन दर्ज हैं। कुल मिला कर कहा जाए, तो इस पूरे मामले में एनजीओ की भूमिका तो साफ तौर पर बेहद संदिग्ध और गैरजिम्मेदार नजर आ रही है, वहीं दूसरी ओर इतनी सब गड़बडिय़ों के बावजूद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के किसी भी चेक बैरियर पर इस गड़बड़ी को नहीं रोका जा सका, इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

Brijesh Singh Desk
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