कोरोना संकट: अस्पताल में 36 में से चिकित्सकों के 20 पद रिक्त

कहने को रतनगढ़ का राजकीय सामान्य चिकित्सालय 100 शैय्याओं वाला अस्पताल है। लेकिन चिकित्सकों के अधिकांश पद रिक्त पड़े होने से खुद बीमार सा लग रहा है। जानकारी के मुताबिक इस अस्पताल में कुल 36 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं जिनमें 15 विशेषज्ञ शामिल हैं, लेकिन 2 विशेषज्ञ कार्यरत हैं। चिकित्

By: Vijay

Published: 03 Apr 2020, 05:46 PM IST

रतनगढ़. कहने को रतनगढ़ का राजकीय सामान्य चिकित्सालय १०० शैय्याओं वाला अस्पताल है। लेकिन चिकित्सकों के अधिकांश पद रिक्त पड़े होने से खुद बीमार सा लग रहा है। जानकारी के मुताबिक इस अस्पताल में कुल ३६ चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं जिनमें १५ विशेषज्ञ शामिल हैं, लेकिन २ विशेषज्ञ कार्यरत हैं। चिकित्सालय में अभी १३ पद रिक्त पड़े हैं तथा कुल मिलाकर २० चिकित्सकों के पद अभी भी रिक्त पड़े हैं। कोरोना संक्रमण के चलते चिकित्सकों पर भारी पड़ रही है। सामान्य दिनों में चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है। मामले को लेकर कस्बेवासियों की ओर से कई बार ज्ञापन भी भेजे गए हैं। लेकिन समस्या से निजात नहीं मिल पाई है। यही नहीं सरकार ने जिले के लिए करीब तीस चिकित्सक लगाए थे लेकिन सीएमएचओ की ओर से कथित राजनीतिक दबाव के चलते उनको दूसरे स्थानों पर लगा दिया है। आलम ये है कि कोरोना संक्रमण के दौर में अस्पताल प्रशासन के पास न तो संंसाधनों की सुविधाएं हैं और न ही पर्याप्त स्टाफ ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रतनगढ़ के चिकित्सालय में तीन चिकित्सक लगाने की घोषणा की गई थी। जिसमें किसी ने अभी तक ज्वाइन ही नहीं किया है।
इन विभागों में नहीं हैं चिकित्सक
आलम यह है कि यहां न तो शल्य चिकित्सक हैं, न ही एनेस्थेटिक विशेषज्ञ है। गायनी का चिकित्सक नहीं, फिजिशियन नहीं, नेत्र चिकित्सक नहीं है। पैथोलोजी का पद भी रिक्त पड़ा है। एक चिकित्सक सोनोग्राफी में रहता है। पिछले दिनों नगर के सभी पार्टियोंं के नेता अस्पताल बचाओ संघर्ष समिति बनाकर एक मंच पर आए और अस्पताल व्यवस्था सुधारने के लिए आन्दोलन का रास्ता भी अपनाया लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात रहा। प्रसूति रोग विशेषज्ञ न होने से दूर से आई गर्भवती महिला को भी रैफर करना पड़ता है। समर्थ लोग खर्चा वहन कर लेते हैं। लेकिन गरीब तबके के लोगों के लिए संकट का काम हो जाता है। अस्पताल केवल रैफर-अस्पताल बनकर रह गया। नर्सिंग स्टाफ में भी पद रिक्त हैं, वर्तमान में राज्य सरकार ने जिले को कई चिकित्सक दिए लेकिन राजनैतिक दबाब के चलते अन्य तहसीलों में लगा दिए गए, जिससे रतनगढ़ का चिकित्सालय अछूता ही रह गया।

Vijay Desk/Reporting
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