#Lockdown:मजदूर को बेटी की तरह किया विदा

एक मजदूर की जिंदगी कितनी मजबूर एवं पीड़ादायी होती है। ऐसी ही कहानी है एक बुजुर्ग महिला अणची देवी की। जिनके पति को गुजरे हुए चालीस वर्ष हो चुके हैं। सिर्फ दो बेटियां हैं, जिनकी मजदूरी कर उनका पालन-पोषण कर शादी की।लेकिन आज भी साठ वर्ष से अधिक की ये महिला मजदूरी कर अपना जीवन बसर कर रही है।

By: Madhusudan Sharma

Published: 05 May 2020, 12:50 PM IST

सादुलपुर. एक मजदूर की जिंदगी कितनी मजबूर एवं पीड़ादायी होती है। ऐसी ही कहानी है एक बुजुर्ग महिला अणची देवी की। जिनके पति को गुजरे हुए चालीस वर्ष हो चुके हैं। सिर्फ दो बेटियां हैं, जिनकी मजदूरी कर उनका पालन-पोषण कर शादी की।लेकिन आज भी साठ वर्ष से अधिक की ये महिला मजदूरी कर अपना जीवन बसर कर रही है। अणची देवी का ससुराल महराणासर चूरू में है तथा पीहर भनीण तारानगर में है। वर्तमान समय में लॉकडाउन लगने से पहले अणची देवी रबि की फसल कटाई के समय मजदूरी करने के लिए सादुलपुर तहसील के गांव पंचायत नूंहद में आई हुई थी। अब कटाई एवं कढाई का काम पूर्ण हो गया। तो मजदूरी मिलना भी बंद हो गई। ऐसे ही हालात में गांव की महिला कमला ने अणची को अपने साथ रखा तथा मानवता का परिचय दिया तथा तीन मई को लॉकडाउन खत्म हो जाएगा, तो अणची वापस चली जाएगी। लेकिन लॉकडाउन बढऩे से अणची की भी परेशानी बढ़ गई।ग्राम्य भारत महाभियान के संयोजन संदीप काजला को जब पता चला तो वह अणची के लिए मददगार बना। अणची ने काजला से अपनी पुत्री के घर गांव झोथड़ा पहुंचाने की मांग की। जिस पर काजला ने अपनी निजी वाहन से पशासन एवं पुलिस की मदद से महिला को उसकी पुत्री के घर छोडऩे की कार्रवाई की। अणची देवी का व्यवहार गांव की महिलाओं को इतना पसंद आया कि बुजुर्ग महिला को एक बेटी की तरह रवाना किया। गांव की महिलाओं ने उपहार स्वरूप नकद रुपए एवं कपड़े आदि देकर विदाई दी गई।

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