किसानों को बारिश की आस, वरना हो सकता है नुकसान

आषाढ़ का एक सप्ताह बीतने के बाद भी किसानों को बारिश का इंतजार है। बारिश का नहीं आना और ऊपर से तेज धूप के कारण बढ़ते पारे के चलते नवांकुर बीजों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

By: Madhusudan Sharma

Published: 03 Jul 2021, 10:15 AM IST

चूरू. आषाढ़ का एक सप्ताह बीतने के बाद भी किसानों को बारिश का इंतजार है। बारिश का नहीं आना और ऊपर से तेज धूप के कारण बढ़ते पारे के चलते नवांकुर बीजों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।अब तक बारिश नही होने से किसान खेतो में खरीफ को बुवाई तक नही कर पा रहे है। करीब बीस दिन पहले हुई हल्की बारिश में मुश्किल से दस प्रतिशत लोग किसानों ने बाजरे की बुवाई की है। लेकिन अब बारिश अब बारिश नही होने से बाजरे की फ सल भी झुलस रही है क्षेत्र में बुवाई कर चुके किसान भी अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है। कृषि अधिकारियों की माने तो चार-पांच दिन में अगर बारिश नहीं हुई तो किसानों की मुश्किलें और अधिक बढ़ जाएगी।
घटेगा खरीफ की फसल का उत्पादन
जिलेभर में किसानों का बाजरे सबसे पसंदीदा फसल है, किसानों को इससे अनाज के साथ ही पशुओं को चारा भी मिल जाता है।ये फ सल कम पानी मे तैयार हो जाती है । किसानों का कहना है कि Óयेष्ठ में बाजरे को फ सल बोई जाती तो अ'छा उत्पादन होता है। किसानों ने बताया कि अबतक दो बार बुवाई कर चुके हैं, लेकिन मानसून ने धोखा दे दिया।ऐसे में पहली बुवाई के दौरान 60 प्रतिशत व दूसरी बुवाई में 40 प्रतिशत फसलें झुलस चुकी है।
प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का खमियाजा
किसानों ने बताया प्रकति के साथ छेड़छाड़ का ही असर है की बारिश का समय बदल चुका है। बड़े बुजुर्ग के अनुसार अबकी बार अ'छा जमाना होना चाहिए क्योंकि बताते हैं टिटहरी चार अंडे देती है।चारों दिशाओं में अ'छा जमाना होता है वह एक काले रंग की चिड़ी जितनी ऊंचाई पर अंडे देती है उस साल बाजरा उतना ही ऊंचा बढ़ता है। इस वर्ष टिटहरी के चार अंडे भी देखे गए हैं। बुजुर्गों का अनुमान है कि चाहे बरसात लेट हो फि र भी जमाना अ'छा होगा। पिछले 15 दिन से मानसून राजस्थान में रुका हुआ है वातावरण में एकदम बदलाव आ गया है जो कि वर्षा ऋ तु में बरसात होने को प्रभावित कर रहा है।
दो लाख से अधिक हैक्टेयर में बुवाई
कृषि अधिकारी कुलदीप शर्मा ने बताया कि बुवाई के लिए बारिश का इंतजार है।उन्होंने बताया कि इस बार जिले में 11 लाख से अधिक क्षेत्रमें बुवाई का लक्ष्य रखा गया है।लेकिन बारिश नहीं होने से फिलहाल 2 लाख 76 हजार 920 हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई है। सुखराम गोस्वामी सांखू फोर्ट ने बताया कि इस बार इंद्र भगवान रूठ गए है Óयेष्ठ माह पूरा बीत गया।लेकिन अभी भी बारिश का इंतजार है किसानों को लगातार बारिश को चिंता सता रही कब होगी बारिश कब होगी बुवाई यह तो भगवान ही जाने।शांति देवी डेरूवाल डाबली ढाणी ने कहा कि खेत सूखे पड़े हुए हैं, किसान बुवाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे है।धीरे-धीरे बुवाई का समय निकलता जा रहा है। बारिश लेट होने से खरीफ को फ सल मे भी उत्पादन में कमी आएगी। ऐसे में सबसे अधिक पशुओं की चिंता सता रही है। निम्बो देवी खबरपुरा ने कहा कि हमारे क्षेत्र के किसान बारिश पर ही निर्भर है बारिश नही होने से पशुओं के चारे को समस्या को चिंता बढ़ रही है ऐसे में किसान बारिश के इंतजार में परेशान नजर आ रहे है। पृथ्वीराज सिंह राठौड़ सांखू फ ोर्ट ने बताया कि किसान कभी सूखे की मार झेलता है तो कभी अतिवृष्टि का शिकार होता है। इन दिनों में किसानों को बारिश का इंतजार है से चिंता बढ़ गई है।पुरानी कहावत को आषाढ़ के पहले सप्ताह तक भी बीज हांडी में रखा हुआ है।

अब तक हुई बुवाई हैक्टेयर में
फसल बुवाई
बाजरा 75200
मूंग 90500
मोठ 19600
चवला 2320
मंूगफली 60000
तिल 800
कपास 9500
ग्वार 16400
अन्य 2600

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Madhusudan Sharma Bureau Incharge
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