scriptGot freedom, but his life was passing in the slavery of darkness | आजादी मिली, लेकिन अंधेरे की गुलामी में बीत रहा इनका जीवन | Patrika News

आजादी मिली, लेकिन अंधेरे की गुलामी में बीत रहा इनका जीवन

चूरू. देश को आजाद हुए 75 वर्ष बीत गए लेकिन शहर में घुमंतु अद्र्ध घुमंतु जातियों की कुछ बस्तियां ऐसी हैं जो आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रही है। प्रशासन से सरकार तक में बैठे लोग लागू की गई योजनाओं की समीक्षा कर आंकड़े भले ही जारी कर रहे हों, लेकिन धरातल पर इन योजनाओं का लाभ इन लोगों को नहीं मिल पा रहा है। करोड़ों रुपए के विकास कार्यों का दावा करने वाला शासन प्रशासन भी आज तक इन परिवारों को ना तो छत उपलब्ध करवा सका है और ना ही अन्य सुविधाएं।

चुरू

Updated: April 27, 2022 12:38:21 pm

चूरू. देश को आजाद हुए 75 वर्ष बीत गए लेकिन शहर में घुमंतु अद्र्ध घुमंतु जातियों की कुछ बस्तियां ऐसी हैं जो आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रही है। प्रशासन से सरकार तक में बैठे लोग लागू की गई योजनाओं की समीक्षा कर आंकड़े भले ही जारी कर रहे हों, लेकिन धरातल पर इन योजनाओं का लाभ इन लोगों को नहीं मिल पा रहा है। करोड़ों रुपए के विकास कार्यों का दावा करने वाला शासन प्रशासन भी आज तक इन परिवारों को ना तो छत उपलब्ध करवा सका है और ना ही अन्य सुविधाएं। हालात ऐसे हैं कि दर-दर ये जाति आज भी दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। इन बस्तियों में रहने वालों के लिए न तो शौचालय की सुविधा है और ना ही, शिक्षा, चिकित्सा की सुविधा है। आज भी जिले में सैकड़ों परिवार ऐसे मिल जाएंगे। जिनको सरकारी सुविधाओं का लाभ तक नहीं मिल पा रहा है।
आशियानों का भी अधिकार नहीं
शहर में इंदिरा कॉलोनी, जयपुर रोड स्थित आरओबी के नीचे, गाजसर गांव सहित अनेक स्थान ऐसे हैं जहां पर घुमंतु-अद्र्ध ं घुमंतु ौर विमंतु जातियों के लोग अब भी अभावों में जीने को मजबूर है। एक ही स्थान पर वर्षो ंं तक रहने के बावजूद इन परिवारों को कोई भी सरकार माकूल स्थान उपलब्ध नहीं करा पाई है। ऐसे में केन्द्र और राज्य और जिला स्तर तक संचालित हो रही योजनाओं पर भी सवाल खड़े होते हैं। प्रधानमंत्री आवास, मुख्यमंत्री आवास सहित कई योजनाएं सरकारों की ओर से चलाई जा रही है। लेकिन इन बस्तियों में रहने वाले लोग अब झुग्ग्यिों में रहने को मजबूर है। जिला मुख्यालय सहित जिले के अनेक स्थानों पर घुमंतु, अद्र्ध घुमंतु और विमंतु जातियों लोग वर्षों से निवासरत है। इन बस्तियों में कालबेलिया, बाजीगर, नायक, कंजर, सपेरा, बावरी, बंजारा, भाट, नट, साटिया, गाडिय़ा लोहार, सांसी, आदि समाज के लोग निवासरत है।
आजादी मिली, लेकिन अंधेरे की गुलामी में बीत रहा इनका जीवन
आजादी मिली, लेकिन अंधेरे की गुलामी में बीत रहा इनका जीवन
योजनाओं का भी नहीं मिल रहा लाभ
केन्द्र और राज्य सरकार आमजन को विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं के माध्यम से लाभान्वित करती है। करोड़ों लोग भी इससे लाभान्वित हो रहे हैं। लेकिन ये झुग्गी झोंपडिय़ों में निवासरत इन जातियों के लोग आज भी कइ्र तरह की सुविधाओं से महरूम है। इन परिवारों में अधिकतर ऐसे हैं जिनके न तो जन आधार कार्ड बने, ना राशन कार्ड है और ना ही वृद्धावस्था पेंशन, स्वास्थ्य बीमा योजना, ऋण योजनाओं का लाभ मिल रहा है। ऐसे लोगों के लिए न तो प्रशासन और ना ही सरकार कोई प्रयास कर रही है और ना ही जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान दे रहे हैं। हालात तो ऐसे हैं कि इन बस्तियों में रहने वाले कई बुजुर्ग लोगों को वृद्धावस्था पेंशन मिल रही है। ऐसे में लोग अभाव में जिदंगी जीने को मजबूर हैं। घुमंतु, अद्र्ध घुमंतु और विमंतु जातियों की बस्तियों में रहने वाले सैकड़ों परिवार जन आधार कार्ड, राशन कार्ड, वृद्धावस्था पेंशन, स्वास्थ्य बीमा योजना, ॠण योजनाओं आदि से वंचित हैं।

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