बंदरों के आंतक के सामने जिम्मेदार बने असहाय

बंदरों को पकडऩे को लेकर नगरपरिषद असहाय नजर आने लगी है, क्योंकि एक दर्जन दफा परिषद को पीडि़त लोगों ने पिछले 6 माह से लिखकर दिया लेकिन परिषद ने कागजी घोड़े दौड़ाकर अब हाथ खड़े कर दिए हंै।

सुजानगढ़. बंदरों को पकडऩे को लेकर नगरपरिषद असहाय नजर आने लगी है, क्योंकि एक दर्जन दफा परिषद को पीडि़त लोगों ने पिछले 6 माह से लिखकर दिया लेकिन परिषद ने कागजी घोड़े दौड़ाकर अब हाथ खड़े कर दिए हंै। नगरपरिषद के जिम्मेदार कहने लगे हैं कि बंदरो को पकडऩे की हमारे पास न तो टीम है ओर न ही संसाधन। नगरपरिषद ने जब वन विभाग के छापर स्थित अधिकारियो से मदद मांगी, तब टका सा जबाव मिला कि वन विभाग के पास भी बन्दर पकडऩे की टीम या विशेषज्ञ नहीं है। छापर से जबाव मिले नगरपरिषद को एक माह का समय बीत गया लेकिन परिषद ने अन्य विकल्पों पर विचार या निर्णय न करके आमजन को बंदरों के आंतक का शिकार होने के लिए राम भरोसे छोड़ दिया। इस कारण वार्ड नं. 19, विश्वकर्मा भवन, बागड़ा बास, वार्ड 18 , 17, नलिया बास, ओसवाल मौहल्ला, वेंकटेश्वर मन्दिर, बस स्टैण्ड के आसपास सहित शहर के अन्य भागो मेंं दो दर्जन बंदरो का भय व आंतक है।
एक की हो चुकी है मौत
वार्ड 19 में आधा दर्जन बंदरो के आंतक से बचने के लिए जब महिला चन्द्रकला सिहाग (27) बचाव के लिए स्नानघर में घुसी, तब विद्युत कंरट से उसकी तत्काल मृत्यु हो गई। यह घटना 26 अक्टूबर की है।

इनका-कहना
-मेरे पुत्र दक्ष (5 वर्ष) को करीब 20 दिन पहले घर में घुसे बंदर ने काट खाया। सरकारी अस्पताल में डा. श्यामलाल माहीच को दिखाया, तब 5-7 इंजेक्शन लगे। घर में आए दिन बंदरो के झुंड आते हंै।
दिनेश बागड़ा, बागड़ा बास सुजानगढ़।

मुझे 2 माह पहले बंदर ने घर पर काट खाया, तब नगरपरिषद आयुक्त को लिखकर दिया था लेकिन अभी उनका आंतक वैसे ही कायम है। घर पर बंदर अन्य नुकसान भी करते है।
कविता शर्मा

-मेरे बच्चों (मोहित 5 वर्ष, ममता 8 वर्ष, रेखा 4 वर्ष) को पिछले चार माह में बंदरो ने 2-2 बार काट खाया। हर वक्त हमारे घरों के आसपास जमघट रहता है। जिम्मेदार चुप हैं।
सागर भाट, काली माई मन्दिर के पास सुजानगढ़।

-मैंने बंदरो को पकडऩे के लिए आयुक्त, एसडीएम सहित अन्य को लिखा लेकिन डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाही कहीं से नहीं हुई और उसके बाद बंदरो की संख्या बढ़ी है।
मनोज पारीक (पूर्व पार्षद) रेलवे फाटक नम्बर एक के पास सुजानगढ़।

हमने वन विभाग छापर को लिखा लेकिन वहां से मदद नहीं मिली। फिर लखनऊ विशेषज्ञों से बात की लेकिन वे राशि ज्यादा मांग रहे हैं, इसलिए अभी तक इनको पकड़ा नहीं जा सका।
बसन्तकुमार सैनी, आयुक्त नगरपरिषद सुजानगढ़।

Madhusudan Sharma
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