Hospitals-Laboratories- निजी अस्पतालों-प्रयोगशालाओं की किसमें कम हो रही रुची

सुजानगढ़. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से पंजीयन नहीं कराने वाले निजी अस्पताल और प्रयोगशालाओं को दी गई विभागीय कार्रवाही की चेतावनी का कोई असर नहीं हुआ। विभाग ने तीसरी बार पंजीकरण की तिथि अप्रेल तक बढ़ा दी। जिले भर में अब तक करीब चार दर्जन प्रयोगशाला व अस्पताल संचालकों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया है जबकि विभागीय जानकारों के अनुसार निजी प्रयोगशालाओं और अस्पतालों की संंख्या इससे तीन-चार गुना ज्यादा है।

By: Vijay

Published: 18 Feb 2020, 10:20 PM IST

सुजानगढ़. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से पंजीयन नहीं कराने वाले निजी अस्पताल और प्रयोगशालाओं को दी गई विभागीय कार्रवाही की चेतावनी का कोई असर नहीं हुआ। विभाग ने तीसरी बार पंजीकरण की तिथि अप्रेल तक बढ़ा दी। जिले भर में अब तक करीब चार दर्जन प्रयोगशाला व अस्पताल संचालकों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया है जबकि विभागीय जानकारों के अनुसार निजी प्रयोगशालाओं और अस्पतालों की संंख्या इससे तीन-चार गुना ज्यादा है। जानकारों का कहना है कि ज्यादातर बड़े निजी चिकित्सा संस्थान और प्रयोगशालाएं पंजीकरण कराने के मूड में नहीं हैं। जिले भर में निजी अस्पतालों ओर प्रयोगशालओ ंमें जांच के नाम पर मरीजों की जेब पर कैंची चलाने वालों पर लगाम लगाने की नीयत से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से पंजीकरण की तिथि 15 सितेेेंबर तक निर्धारित की गई थी। बाद में इस 15 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया। अब इसे तीसरी बार बढ़ाया गया है। बताया जाता है विभाग के सभी प्रयासों के बाद भी निजी अस्पताल ओर प्रयोगशाला संचालको ने पंजीकरण में दिलचस्पी नहीं दिखाई। आवेदन के लिए तिथि निर्धारण के पहले और दूसरे माह में आवेदन करने वालो की सं?या करीब चार दर्जन तक पहुंची। मगर अब भी ज्यादातर बड़े निजी संस्थानों ने आवेदन नहीं किए हैं। जबकि विभाग जानकारों के अनुसार जिले के बीदासर, रतनगढ़, चूरू, सरदारशहर, राजगढ़, तारानगर, सालासर, छापर, सिद्धमुख, साहवा आदि क्षेत्रों में निजी अस्पतालों एवं लैबों की संख्या प्राप्त आवेदनों से कई गुना ज्यादा है। विभागीय अधिकारियों की ओर से किए गए प्रयासों को केवल खानापूर्ति बताया जा रहा है। स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विभागीय अधिकारियों को निजी प्रयोगशालाओं और अस्पतालों के संचालन और इनमें होने वाली जांचों के बारे में जानकारी तो है, लेकिन विभाग की ओर से पंजीकरण नहीं कराने की स्थिति में कार्रवाही की बात तो कही जा रही है, लेकिन पंजीकरण के लिए उठाए गए कदमो के बारे में अधिकारी यह कहकर चुप्पी साध लेते हैं कि अभी तो तिथि बढ़ी है, फिर देखा जाएगा। जानकारों के अनुसार विभागीय अधिकारियों को पंजीकरण नहीं कराने वाले संस्थानंो के खिलाफ कार्रवाही करने के अधिकार नहीं दिए गए। यही वजह है कि स्थानीय अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों से मिले निर्देश निजी संस्थानों को दे दिए। अब इसकी पालना नहीं की जाती है तो अधिकारी ही कुछ कर सकते हैं। जानकार सूत्रों ने बताया कि राजस्थान नैदानिक स्थापन (रजिस्टे्रशन एवं नियमन) नियम 2013 लागू कर दिया गया है। केन्द्र सरकार द्वारा समस्त चिकित्सा संस्थान एवं प्रयोगशालाओं के लिए न्यूनतम मानक तय कर दिए गए हैं। इसके तहत समस्त निजी चिकित्सालय, नर्सिंग होम, मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, डे-केयर, प्रयोगशाला, इग्मेजिंग सेंटर, दंत क्लिनिक चिकित्सालय, पोली क्लिनिक, आयुर्वेदिक चिकित्सक, हो?योपैथी, यूनानी चिकित्सा केन्द्र आदि को क्लिनिक एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी दावा करते है कि निर्धारित तिथि के समाप्त होने के बाद जिले भर में विभाग की ओर से दलो का गठन कर सर्वे कराया जाएगा और प्रावधान के अनुसार कार्रवाही भी की जाएगी। पंजीकरण में आनाकानी करने वालों को सूचीबद्ध किया जाएगा।

Vijay Desk/Reporting
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