सुजानगढ़ कृषि मंडी परिसर बन रहा है मयूर विहार

कृषि उपज मंडी की पहचान वैसे तो किसानों से जुड़ी होती है लेकिन सबकुछ ठीकठाक रहा तो अब इसे राष्ट्रीय पक्षी मयूर की शरण स्थली के रूप में जाना जाएगा।

By: Madhusudan Sharma

Published: 21 Jun 2021, 09:45 AM IST

सुजानगढ़ (ग्रामीण). कृषि उपज मंडी की पहचान वैसे तो किसानों से जुड़ी होती है लेकिन सबकुछ ठीकठाक रहा तो अब इसे राष्ट्रीय पक्षी मयूर की शरण स्थली के रूप में जाना जाएगा। खास बात ये है कि यहां मोर सैंकड़ों की संख्या में निर्भय होकर अपना कुनबा बढ़ा रहे हैं। मंडी में आने वाले लोग इतने बड़े पैमाने पर मोरों को देखकर काफी खुश हैं। यहां मोर सुरक्षित रहें इसके लिए इनकी देखभाल का जिम्मा खुद एसडीएम मूलचंद लूणीया उठाए हुए हैं। उन्होनें बताया कि पहले मंडी परिसर में मौजूद आवारा श्वान मोरों को आसानी से अपना निशाना बना लेते थे। अब ऐस नहीं होगा। उन्होंने बताया कि जब वे सुजानगढ़ में पद स्थापित हुए व मंडी परिसर में रहने आए, तो उन्होनें मोरों को असुरक्षित पाया। यहीं से उन्होंने इन्हें बचाने की दिशा में पहल करते हुए देखभाल की शुरुआत की। वे रोज सुबह 5 बजे उठकर करीब 44 बीघा में फैले मंडी परिसर का भ्रमण करते हैं। इसमें उनकी पत्नी संगीता लूणिया भी बराबर सहयोग करती हैं। जिसका नतीजा ये रहा है कि अब 2 सौ से भी अधिक मोर मंडी परिसर में स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं।

मंडी में इस्रायली बबूल हटेंगे, नीम, पीपल व बरगद लगेंगे
एसडीएम ने बताया कि मंडी के अधीन कुल 44.5 बीघा जमीन है। जिसमें से 14.5 बीघा में पक्का निर्माण हैं। शेष 30 बीघा जमीन में फैले इस्रायली बबूलों का उन्मूलन करवाया जाएगा। इसके बाद वन विभाग व सामाजिक संस्थाओं को जोड़कर इसे हरा भरा बनाने की योजना है। इसके लिए चार्ट बनाकर मंडी परिसर में स्थित सड़कों के किनारे व खाली पड़ी जमीन में नीम, पीपल, अशोक, शीशम, बरगद के पेड़ लगेंगे, इसके अलावा फलों के पौधे व झाडिय़ां भी लगाई जाएंगी।
अनाज की प्रचूरता व सुरक्षा से बढ़ रहे हैं पक्षी
मंडी परिसर में पक्षियों के कलरव के शोर के बारे में पूछे जाने पर एसडीएम ने बताया कि यहां पर 36 बड़े पानी के परिंडे लगाएं गए हैं, जिन्हें मंडी के कार्मिक रोजाना सुबह - शाम भरते हैं। वहीं लॉकडाउन के चलते इंसानी आवाजाही बंद हुई तो पक्षी खुद को सुरक्षित मानते हुए यहां अपना डेरा जमाने लगे हैं। भोजन की प्रचुरता व सुरक्षा के चलते मोरों के अलावा यहां लोकल प्रजातियों के हजारों पक्षी रहने लगे हैं।

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Madhusudan Sharma Bureau Incharge
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