खुद हाईरिस्क पर, तीन-तीन बार लेती हैं इंसुलिन, पर मरीजों की तीमारदारी नहीं छोड़तीं

न्हें दिन में तीन बार 10-20-10 यूनिट इंसुलिन लेनी पड़ती है, लेकिन तकरीबन 22 साल इस अस्पताल को दे चुकी सोसोमा का मन मरीजों के बिना नहीं लगता।

By: Brijesh Singh

Published: 10 May 2020, 09:10 AM IST

चूरू. पूरा देश इस समय कोविड-19 नामक महामारी से जूझ रहा है। सभी अपनी तरह से इस महामारी से लडऩे का रास्ता निकाल रहे हैं और लड़ भी रहे हैं। कोरोना मरीजों का परीक्षण और उपचार कर रहा चिकित्सक समुदाय जहां सीधे संक्रमितों और संदिग्ध रोगियों से मोर्चा ले रहा है, तो वहीं चिकित्सा जगत की एक ऐसी भी यूनिट है, जो कोविड-महामारी से इतर पल-पल जिंदगी के लिए जूझ रहे रोगियों की सेवा में दिन रात एक किए हुए हैं। यह हमारे पर्दे के पीछे के कोरोना योद्धा हैं, जो इनकी सेवा में खुद को समर्पित किए हुए हैं। हम बात कर रहे हैं डीबीएच अस्पताल चूरू की डायलिसिस यूनिट की।

तीन-तीन इंजेक्शन लेकर भी मरीजों की सेवा से पीछे नहीं
केरल निवासी सिस्टर 50 वर्षीया सोसोमा केयू डाइबिटीज की मरीज हैं। यहां तक कि उन्हें दिन में तीन बार 10-20-10 यूनिट इंसुलिन लेनी पड़ती है, लेकिन तकरीबन 22 साल इस अस्पताल को दे चुकी सोसोमा का मन मरीजों के बिना नहीं लगता। इसीलिए वे कोरोना संक्रमण के इस दौर में हाई रिस्क जोन में होने के बावजूद नियमित काम पर आ रही हैं और 12 घंटे ड्यूटी दे रही हैं। घर पर 18 साल का बच्चा और पति होते हैं, लेकिन जाकर दूर-दूर बात करने के बाद वे अपने कमरे में खुद को आईसोलेट कर लेती है।

चूरू की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...

Brijesh Singh Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned