काव्य लेखन कठिन

काव्य लेखन भी एक कला है। इस कला के माध्यम से कवि न जाने कैसी गंभीर कर जाता है जिसको पढ़कर मनुष्य सोचने लग जाते हैं।

By: Madhusudan Sharma

Published: 05 Sep 2020, 01:08 PM IST

चूरू. काव्य लेखन भी एक कला है। इस कला के माध्यम से कवि न जाने कैसी गंभीर कर जाता है जिसको पढ़कर मनुष्य सोचने लग जाते हैं। इन कविताओं के माध्यम से समाज को एक संदेश देने का काम किया जाता है जो जीवन के सार को समझाती है। काव्य लेखन कठिन है। क्योंकि इसमें शब्दों का चयन कर एक माला के रूप में पिरोना बहुत ही कठिन काम है। ऐसा ही कार्य किया है सरदारशहर के सत्यनारायण झाकल ने। जिन्होंने मनुष्य की मनमानी, मनुष्य की चतुरता आदि को काव्य के माध्यम से समझाने का प्रयास किया है।

अंर्त- द्वंद्व
आदमी खाता है ठोकरें
अपनी होशियारी के कारण
मानता है स्वयं को, अपना भाग्य विधाता
करता है मनमानी, उधार के ज्ञान से
समझ नहीं पाता लेख विधाता के।
अपनी सीमा को चाहता है लांघना
सारी मर्यादाएं कुदरत की, सुनता भी नहीं अपने मन की, अंतरआत्मा की
यही स्वतंत्रता बदलती है स्वच्छंदता में बन जाती है, कारण ठोकरों का
फिर भी नहीं संभलता है यह आज तक नहीं संभल पाया है।
सत्यनारायण झाकल, सरदारशहर

Madhusudan Sharma Bureau Incharge
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