Primary Education: गूगल का बोलो एप पढ़ाई में बन रहा मददगार

Primary Education:प्राथमिक शिक्षा के विद्यार्थियों में पढऩे की क्षमता विकसित करने में अब गूगल का बोलो एप मददगार साबित हो रहा है। इस एप के माध्यम से बच्चों की जिज्ञासा को बढ़ाया जा रहा है और उनमें अध्ययन की इच्छा जाग्रत की जा रही है।

By: Madhusudan Sharma

Published: 03 Jan 2020, 01:45 PM IST

मधुसूदन शर्मा
चूरू. प्राथमिक शिक्षा (Primary Education) के विद्यार्थियों में पढऩे की क्षमता विकसित करने में अब गूगल का बोलो एप (Google Bolo app for Children Education) मददगार साबित हो रहा है। इस एप के माध्यम से बच्चों की जिज्ञासा को बढ़ाया जा रहा है और उनमें अध्ययन की इच्छा जाग्रत की जा रही है। इसका परीक्षण भी किया जा चुका है। जिसका बच्चों की शिक्षा (Child Education) पर काफी सकारात्मक असर पड़ा है। इस कार्य को अंजाम दिया है पीरामल फाउण्डेशन के फैलो ने। जिन्होंने ग्रामीण क्षेत्र की स्कूलों में जिनके पास एंड्राइड मोबाइल है। इस एप को डाउनलोड कराया है और इसके माध्यम से कैसे पढ़ा जाए। ये समझाया भी गया है। इस एप से अभिभावक भी बच्चों को घर पर आसानी से पढ़ा सकते हैं। यह एक टयूटर एप की तरह डिजाइन किया गया है। इस ऐप में आवाज सुनकर पढऩे की क्षमता विकसित की गई है। जिसकी मदद से छोटे बच्चे पढऩा सीख सकते हैं। चूरू जिले में बोलो एप का प्रयोग शुरू कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप राजगढ़ ब्लाक में अब तक 200 बच्चों को इस एप्लीकेशन के उपयोग करने की जानकारी दे चुके हैं। चूरू में भी लगभग 250 बच्चों को इस एप्लीकेशन को डाउनलोड करवा कर इसके उपयोग करने की विस्तृत जानकारी दी गई है। जिसके बेहतर परिणाम भी सामने आ रहे हैं। जिले के पांच ब्लॉक रतनगढ़, सुजानगढ़, चूरू, सादुलपुर और तारानगर में ये काम गांधी फैलोज की ओर से किया जा रहा है। गांधी फैलोज सुरभीसिंह, राहुल कुमार, विवेक कुमार, तृप्ति गुप्ता, दिव्यांशु कुमार गूगल के बोलो एप से बच्चों की अध्ययन क्षमता को विकसित कर रहे हैं।


कर रहे अनुसंधान
अपने कम्युनिटी इमर्शन के द्वितीय चरण में भी गांधी फैलोज अपने-अपने समुदाय में 25 बच्चों को चुनकर उनके माध्यम से बोलो एप की उपयोगिता को जानने के लिए अनुसंधान कर रहे हैं। इस अनुसंधान के माध्यम से गांधी फैलोशिप के फैलोज प्रयास कर रहे हैं कि बच्चे इस एप्लीकेशन का उपयोग कर पढऩा सीखें और इसका मूल्यांकन भी करें ताकि इस एप्लीकेशन की उपयोगिता भी जानी जा सके।


इंटरनेट की भी जरूरत नहीं
तकनीकी का बेहतर इश्तेमाल शिक्षा के लिए कैसे किया जाए। इसका फैलोज ने बखूबी सदुपयोग किया है। बोलो एप ऐसा है जिसको डाउनलोड करने के बाद इसे चलाने में इंटरनेट की भी जरूरत नहीं है। बिना इंटरनेट के भी बच्चा पढ़ सकता है। राजस्थान के कई ब्लॉक्स में गांधी फेलो के माध्यम से इस एप्लीकेशन को डाउनलोड करना और इसका इस्तेमाल करना सिखाया जा रहा है।


चुनौतियां भी कम नहीं
इस एप को लेकर काफी चुनौतियां भी है। अभिभावकों एवं शिक्षकों में टेक्नॉलॉजी की अस्वीकार्यता है। इस चुनौती को दूर करने के लिए सारे गांधी फैलोज टेक्नोलॉजी तथा बोलो एप को लेकर जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं।

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