बेटी के श्राप से पत्थर का बन गया था रेजड़ी गांव

तहसील का एक ऐसा गांव जो सैकड़ों साल पूर्व पत्थर के खंडहरों में तब्दील हो गया था जो आज भी आबाद है। किवदंती के अनुसार एक बेटी के श्राप से यह गांव पत्थर का बन गया था।

By: Madhusudan Sharma

Updated: 30 Oct 2020, 08:42 AM IST

भंवरसिंह राजपूत
सादुलपुर. तहसील का एक ऐसा गांव जो सैकड़ों साल पूर्व पत्थर के खंडहरों में तब्दील हो गया था जो आज भी आबाद है। किवदंती के अनुसार एक बेटी के श्राप से यह गांव पत्थर का बन गया था। तहसील मुख्यालय से करीब 60 किमी दूर रेजड़ी गांव तहसील की एकमात्र लावा निर्मित ग्रेनाइट पहाड़ी के पास बसा हुआ है। पहाड़ी की शक्ल में उजड़ा हुआ प्राचीन रेजड़ी गांव पत्थर की सूरत में आज भी अपने इतिहास की गवाही दे रहा है। जानकारों के मुताबिक गांव की एक विवाहिता बेटी ने अपने पुत्र जन्म के समय भाई से शुद्ध देशी घी मंगवाया था। उसने अपनी सास की ओर से जमाए घी को खाने से इनकार कर दिया था। भाई घी लेकर बहन के घर आया तो ऊपरी भाग में घी था,लेकिन नीचे गोबर भरा हुआ था।
रेजड़ी पहाड़ी पर अब भी अवशेष
पीहर पक्ष के इस बर्ताव को वह सहन नहीं कर पाई और भाई के सामने ही श्राप दे दिया कि सारा रेजड़ी खेजड़ी गांव पत्थर का हो जाए। मान्यता है कि तभी तत्कालीन सारा रेजड़ी गांव पशु पखेरू सहित पत्थर का हो गया था। तत्कालीन मकानों की बटोड़े व झोपड़ीनुमा बनावट रेजड़ी की पहाड़ी पर आज भी स्पष्ट दिखती है। पत्थर की कई शिलाओं में मानव मूर्त झलक रही है। शापित पहाड़ी क्षेत्र में आज भी देवी माता का पूजा स्थल है।
समय के थपेड़ों से बदला मूल रूप
बुजुर्ग बेलीराम झाझडिय़ा ने बताया कि पहाड़ी पर विस्फोट व प्राकृतिक आपदाओं के चलते आकृतियां अपना मूल स्वरूप खो चुकी है। शापित रेजड़ी की पहाड़ी का पत्थर कोई भी ग्रामीण अपने घर नहीं ले जाता है। वर्तमान रेजड़ी गांव पुराने रेजड़ी गांव को पार कर वर्तमान रेजड़ी गांव पहुंचते ही एक खुशहाल गांव की तस्वीर नजर आती है। युवक बसंत झाझडिय़ा के अनुसार रेजड़ी गांव में विभिन्न जातियों के करीब तीन सौ घर हैं। यहां की जनसंख्या लगभग 1800 है, जिनमें से करीब 1100 व्यक्ति मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं। गांव में नौकरी पेशे के लोग अधिक हैं। सौ से अधिक व्यक्ति विभिन्न सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। यहां के अधिकतर लोग बारानी खेती पर आश्रित हैं।
रेजड़ी गांव की यह है मुख्य समस्याएं
रेजड़ी गांव तहसील व जिला मुख्यालय से काफी दूर है। यातायात के साधन व रोडवेज बस सुविधा का अभाव है। सुनील पूनिया ने बताया कि यहां केवल आठवीं कक्षा तक का सरकारी स्कूल है। कोई खेल मैदान नहीं है। इसके अलावा पिछले दो साल से अपनी योजना के पेयजल की भी किल्लत हो गई है। इस बार बारानी खेती बारिश के अभाव में चौपट हो गई है। वर्षा के अभाव में रबी फसल की भी बुवाई नहीं हुई है।

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Madhusudan Sharma Bureau Incharge
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