Swachh Bharat Mission: लगा झटका, जब आधे शहर में काम छोड़ गए सफाईकर्मी

Swachh Bharat Mission: नगर परिषद से भुगतान अटकने के चलते अचानक ही चूरू में आधे से ज्यादा वार्डों में सफाईकर्मी हड़ताल पर चले गए।

Brijesh Singh

February, 1511:45 AM

चूरू. चूरू शहर के 40 से अधिक वार्डों के लिए शुक्रवार की सुबह स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) को करारा झटका लगा, जब कचरा उठाने वाले सफाईकर्मियों समेत ठेके पर आने वाले सभी कर्मचारी अचानक आधे से ज्यादा शहर में हड़ताल पर चले गए। दरअसल, दो फर्मों से संबंद्ध करीब दो सौ कर्मचारी शुक्रवार को अचानक हड़ताल पर चले गए। इनमें कचरा गाड़ी यानी ऑटो टिपर चलाने वाले ड्राइवरों के अलावा उनके साथ कचरा उठाने के लिए आने वाले हेल्पर भी शामिल हैं।

क्या है मामला
जानकारी के अनुसार अक्टूबर महीने में सफाई ठेके की प्रक्रिया पूर्ण हो जाने के बाद ठेकेदार फर्म के कर्मचारी सफाई के काम में लग गए। मोटे तौर पर सात जोनों के 21 वार्डों में साफ-सफाई और कचरा परिवहन के काम में लगे इन कर्मचारियों के पहले महीने का बिल समय से नगर परिषद के पास पहुंच भी गया, लेकिन वह पास नहीं हुआ। इतना ही नहीं, अगले दो बिल भी परिषद के पास लंबित ही पड़े रहे। सफाई ठेकेदारों के मुताबिक उन्होंने पिछले बिलों के भुगतान के लिए लगातार नगर परिषद आयुक्त और चेयरमैन से संवाद बनाए रखा, लेकिन बिलों का भुगतान नहीं हो सका। इस दौरान ठेकेदार अपने पास से थोड़ा बहुत पैसा देकर सफाई कर्मचारियों को काम पर आने के लिए राजी
करते रहे।

यूं टलता रहा मामला
ठेका फर्म के सुपरवाइजर विजय की मानें, तो पिछले दिनों एक तरह से कर्मचारियों ने अल्टीमेटम दे दिया था कि अगर उनका पूरा बकाया भुगतान नहीं हुआ, तो वे काम रोक देंगे। इस बाबत भी वे मौजूदा चेयरमैन को लगातार बताते रहे, लेकिन चेयरमैन भी वित्तीय स्वीकृति न होने की बात कहते हुए जल्दी ही व्यवस्था कराने की बात कहते हुए मामले को टालती रहीं। नतीजा यह हुआ कि शुक्रवार को अचानक ही सामूहिक रूप से सभी ठेकाकर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर दिया और वे सुबह न तो वार्डों में सफाई के लिए गए और न ही ऑटो टिपर ही वार्डों में गए, क्योंकि उनके ड्राइवर भी ठेका फर्म ही सप्लाई करती थी। मोटे तौर पर इसका असर वार्ड नंबर एक से 10 तक हुआ। इसके अलावा वार्ड 11 और 15 के अलावा वार्ड 41 से 60 तक के वार्ड भी इस कार्य बहिष्कार के लपेटे में आ गए। इनमें चेयरमैन पायल सैनी का अपना वार्ड भी शामिल रहा।

खींचतान में उलझा मामला
जानकारों की मानें, तो यह सारा मामला नए बोर्ड ( Churu Nagar Parishad )के आने के बाद से और उलझ गया है। टेंडर भाजपा के नेतृत्व वाली नगर परिषद की बोर्ड के समय पारित हुआ। एकाध बिल भी उसी समय पारित हुए। लेकिन जब से कांग्रेस के नेतृत्व वाला नया बोर्ड बना, तब से मामला और उलझ गया।इसके पीछे तत्कालीन आयुक्त और मौजूदा चेयरमैन के बीच खींचतान को भी एक वजह माना गया। कहा जाता है कि इस दौरान तत्कालीन आयुक्त एक बार मेडिकल पर लंबी छुट्टी गईं, तो कार्यकारी आयुक्त की जि?मेदारी संभाल रहे अधिकारी के हाथ में वित्तीय पावर ट्रांसफर हो गई थी, लेकिन उसके बाद जैसे ही तत्कालीन आयुक्त ने कार्यभार दोबारा से संभाला, वह आदेश अपने आप ही अप्रभावी हो गया। उधर तत्कालीन आयुक्त ने भी बिल पारित नहीं किया और उसका भुगतान अटका ही रहा।

अब क्या...
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नगर परिषद के वित्तीय मामलों के चलते कामकाज रुकने का हल दो ही तरीके से निकल सकता है। एक तरीका तो यह है कि मौजूदा कार्यकारी आयुक्त को ही एक बार पुन: वित्तीय अधिकार मिल जाएं। इसके लिए लंबी प्रशासनिक कार्यवाही की आवश्यकता है। उम्मीद है कि सोमवार तक इस मसले का हल निकल सकता है और मौजूदा कार्यकारी आयुक्त के पास ही वित्तीय स्वीकृति के अधिकार आ जाएंगे। दूसरा रास्ता स्थायी तौर पर आयुक्त की तैनाती का है, जिसको लेकर अभी यह माना जा रहा है कि स्थानीय राजनीति की जटिलताएं शायद इतनी जल्दी आयुक्त की तैनाती में रोड़ा पैदा करें। लिहाजा सर्वसम्मति होने तक यह मामला टल सकता है।न टिपर चले, न नालियां साफ हुईं, कचरा भी जहां का तहां पड़ा रहा।

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Brijesh Singh Desk
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