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ये है आंगनबाड़ी केन्द्रों की हकीकत-- जीर्णशीर्ण भवनों में चल रहे केन्द्र, कुछ केंद्र बंद मिले, कहीं कार्मिक नदारद

बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के साथ ही पोषण देने के लिए संचालित आंगनबाडिय़ों के पास अभी तक स्वयं के भवन ही नहीं है। यही वजह है कि आंगनबाड़ी केंद्र या तो किराए के भवनों में चल रहे हैं या फिर उधार के सरकारी भवनों में हैं।

चुरू

Updated: April 14, 2022 01:15:23 pm

बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के साथ ही पोषण देने के लिए संचालित आंगनबाडिय़ों के पास अभी तक स्वयं के भवन ही नहीं है। यही वजह है कि आंगनबाड़ी केंद्र या तो किराए के भवनों में चल रहे हैं या फिर उधार के सरकारी भवनों में हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के लिए कोई विशेष इंतजाम भी नहीं हैं। चाहे वह शौचालय, बैठने के लिए दरी और पानी की व्यवस्था की बात हो। जिले में कुल 255 आंगनबाडिय़ों के पास स्वयं का भवन नहीं हैं।

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जिले में वर्तमान में कुल 1677 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिसमें शहर में ही 112 केंद्र चल रहे हैं। विभाग के मुताबिक 1677 केंद्रों में से अभी तक 682 केंद्रों के पास ही स्वयं का विभागीय भवन है, जबकि 255 केंद्र ऐसे है जो किराए के भवन में चल रहे हैं, जिन्हें भी स्वयं के भवन की दरकार है। विभाग के अधिकारियों की माने तो जिले में संचालित कुल आंगनबाडिय़ों में में से 500 विद्यालयों में संचालित है, वहीं 240 अन्य सरकारी भवनों में चल रही है। जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के पास स्वयं का भवन नहीं हैं, उनमें किराए के या अन्य सरकारी भवन के एक-एक कमरों में केंद्र चलाने में काफी दिक्कत होती है। स्थिति यह है कि एक-एक कमरे में बच्चे बैठाए जाएं या फिर पोषणाहार रखा जाए। एक कमरे में केंद्र संचालन में काफी दिक्कतें आती हैं।

सादुलपुर में आंगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लिया गया तो देखने को मिला कि अनेक जगहों पर आंगनबाड़ी केंद्र बंद मिले तो कहीं आंगनबाड़ी केंद्रों पर कोई उपस्थित नहीं मिला। हालांकि कोरोना काल के बाद से बच्चों की उपस्थिति के लिए अभी अनुमति नहीं मिली है लेकिन सूखा पोषाहार बच्चों को वितरण किया जा रहा है। अनेक लोगो ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि केंद्रों में कार्यरत कार्मिक सरकार की योजना अंतर्गत वार्डो में भी नहीं जाते जिसके कारण जरूरत मंद परिवार को पूरा लाभ नही मिल पाता है मात्र खाना पूर्ति है तथा कागजो में बच्चे नामांकित हैं। केंद्रों पर तीन कार्मिक की ड्यूटी होती है जिसमे कार्यकर्ता सहायिका आशा सहयोगिनी शामिल है।लेकिन केंद्रों पर तीन कार्मिकों की उपस्थिति नही मिलती है शहर के वार्ड संख्या 6 में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र खुला हुआ पाया गया लेकिन केंद्र पर कोई उपस्थित नहीं था आसपास पता करने पर जानकारी पाई के आंगनबाड़ी केंद्र को खोलकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता वार्ड में सर्वे के लिए गई है। इसी प्रकार वार्ड संख्या 23 में केंद्र खुला हुआ पाया गया केंद्र की सहायिका कृष्णा केंद्र संबंधी या विभाग संबंधी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई लेकिन केंद्र में पोषाहार पड़ा हो पाया तथा बताया कि केंद्र में जीरो से 3 वर्ष तक के बच्चों की संख्या 29 है जबकि इससे अधिक की उम्र की बच्चों की संख्या 30 नामांकित है लेकिन केंद्र पर मात्र एक सहायिका ही उपस्थिति थी। वार्ड आठ में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र खुला हुआ था पोषाहार भी रखा हुआ था लेकिन दो कार्मिक उपस्थित थी राजकीय स्कूल नंबर 1 में वार्ड संख्या 24 का संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पर एक सहायिका उपस्थित थी तथा केंद्र पर 58 बच्चे नामांकित है।

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