प्रकृति के आगे मनुष्य के सभी अविष्कार बौन: विमलसागर

प्रकृति के आगे मनुष्य के सभी अविष्कार बौन: विमलसागर

कोयम्बत्तूर/ ईरोड. जैन आचार्य विमलसागरसूरि महाराज ने गुरुवार को कहा कि कोरोना वायरस मनुष्य जाती को निगलता जा रहा है। यह असाध्य महामारी भयानक रूप ले चुकी है। प्रकृति के समक्ष मनुष्य के आविष्कार, तकनीकी विकास और सामथ्र्य कितने बौने हैं, यह इस महामारी से सिद्ध हो रहा है।
जैनाचार्य पेरुंदुराई में इरोड, तिरुपुर, कोयम्बतूर, सेलम, तीर्ची, चेन्नई, बेंगलोर आदि क्षेत्रों की विविध सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सभा को मार्गदर्शन दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि मांसाहार से कोरोना वायरस मनुष्य में संक्रमित हुआ है। चीन में जिस प्रकार जीव-जंतुओं व पशु-पक्षियों को खाया जाता है, उसे देखकर कहा जा सकता है कि मनुष्य दया का पात्र नहीं हैं।
आचार्य ने शाकाहार को श्रेष्ठ, सुरक्षित मानवीय आहार बताया। आज तक शाकाहार से कोई वायरस नहीं फैला है।
उन्होंने कहा कि मांसाहार से पैसा, पानी, करुणा, मानवता, निरोगिता, सुख-शांति और जीवन की संभावना, सबको समाप्त किया है। शांति से जीने के लिए शाकाहार ही एकमात्र विकल्प है। देर सबेर प्रकृति सबके साथ न्याय की व्यवस्था करती है।

Rahul sharma Reporting
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