फिर सैलानियों से चहकेगा बारालीकाडु

फिर सैलानियों से चहकेगा बारालीकाडु
फिर सैलानियों से चहकेगा बारालीकाडु

Rajendra Shekhar Vyas | Updated: 23 Sep 2019, 09:24:08 PM (IST) Coimbatore, Coimbatore, Tamil Nadu, India

पर्यटन: बारालीकाडु इको-टूरिज्म सेंटर अगले सप्ताह से फिर पर्यटकों के लिए खुलेगा
बाढ़ का पानी भरने से एक माह से बंद था बारालीकाडु इको-टूरिज्म सेंटर
जल और जंगल के बीच प्राकृतिक वातावरण में पर्यटन का लुत्फ

कोयम्बतूर. शहर के निकट प्राकृतिक वातावरण में जल और जंगल के बीच पिकनिक स्पॉट मिल जाए तो प्रकृति प्रेमी सैलानियों के लिए बरालीकाडु पसंदीदा पर्यटन स्थल है। पिछले एक माह से बंद क्षेत्र का यह अनूठा पर्यटन स्थल 'बारालीकाडु इको-टूरिज्म सेंटर' अगले सप्ताह फिर से सैलानियों के लिए खोला जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले करीब एक माह से पिल्लूर बांध से लगातार पानी की आवक और भवानी नदी के वेग पर होने की वजह से इसे बंद करना पड़ा था। पानी भी उतरने के बाद सैलानियों के लिए अब यह सुरक्षित है और वन विभाग ने इसे पर्यटन के लिए पुन: खोलने का निर्णय किया है।
पहाड़ी पर छोटे से जंगल के बीच आबाद है आदिवासियों का गांव बारालीकाडु, जो पिल्लूर बांध के बैक वाटर और अथिकदवु नदी तट के निकट है। वन विभाग ने यहां स्थानीय आदिवासी समुदाय के साथ मिल कर इको-टूरिज्म परियोजना शुरू की थी।
क्षेत्र के आदिवासी परम्परागत छोटी-छोटी नौकाओं में सैलानियों को सवार कर बैक वाटर के नजारे दिखाते हैं। एक बार में 60 मिनट की सवारी कराई जाती है, जिसमें नदी के एक से दूसरे छोर पर ले जाया जाता है। एक नौका में पांच सैलानियों को बैठने की अनुमति है। नदी में पानी और पेड़ों के बीच नौकायन का आनंद लेने के दौरान यदि जंगल का आनंद लेना चाहें तो नौका को रोका भी जाता है। बांध का पानी जंगल के एक हिस्से तक भरा रहता है। पानी और पेड़ों के बीच नौकायन का आनंद लेने दूसरे प्रदेशों से भी बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं। इस पिकनिक क्षेत्र में प्लास्टिक के उपयोग, धूम्रपान और मदिरा सेवन पर भी प्रतिबंध है। यहां पर्यटन के दौरान आदिवासी जन जीवन और संस्कृति को करीब से जानने-समझने का भी मौका मिलता है। सप्ताहांत के दौरान यहां बड़ी संख्या में सैलानी जंगल में घूमने आते हैं और पहाड़ों पर खेतों के बीच पूरा दिन आदिवासियों के गांव में बिताते हैं। लेकिन पिछले एक महीने के दौरान पश्चिमी घाट इलाके में हुई भारी बारिश के कारण पिल्लूर बांध में पानी का प्रवाह बढ़ गया था। आस-पास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हो गए थे। बारालीकाडू क्षेत्र जलमग्न हो गया। तब सैलानियों की सुरक्षा को देखते हुए इसे बंद करना पड़ा था। वन विभाग एवं आदिवासियों के समन्वय से संचालित इस प्रोजेक्ट से पचास से अधिक आदिवासी परिवार जुड़े हुए हैं। एक माह बंद रहने के कारण उनकी आजीविका भी प्रभावित हुई थी। बारालीकाडु के लिए वन विभाग के कोयम्बत्तूर कार्यालय के अलावा आन लाइन बुकिंग भी की जाती है।

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