अस्पताल में शिशुओं के लिए उपयोगी सामग्री भेंट

अस्पताल में शिशुओं के लिए उपयोगी सामग्री भेंट

Kumar Jeevendra | Publish: Apr, 17 2019 07:38:50 PM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 07:38:51 PM (IST) Coimbatore, Coimbatore, Tamil Nadu, India

दी जैन मिशन चैरिटेबल ट्रस्ट सेलम के तत्वावधान में त्रिशला महिला मंडल की सदस्याओं ने सोमवार को यहां मोहन कुमारमंगलम राजकीय अस्पताल के शिशु वार्ड में नेपकिन, हॉर्लिक्स ,बिस्किट व अन्य उपयोगी सामग्री वितरित की।

सेलम. दी जैन मिशन चैरिटेबल ट्रस्ट सेलम के तत्वावधान में त्रिशला महिला मंडल की सदस्याओं ने सोमवार को यहां मोहन कुमारमंगलम राजकीय अस्पताल के शिशु वार्ड में नेपकिन, हॉर्लिक्स ,बिस्किट व अन्य उपयोगी सामग्री वितरित की।नवप्रसूता महिलाओं से कुशल क्षेम पूछी। शिशुओं के लिए सहायता सामग्री मिलने पर माताओं ने आभार जताया।
अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने जैन समाज के प्रयासों की सराहना की।
मंडल की मंत्री निधि खटोर ने बताया कि भगवान महावीर जयंती के उपलक्ष्य में ट्रस्ट की ओर से जनसेवा के अन्य कार्य किए जाएंगे। अन्नदान के तहत त्रिशला महिला मंडल को यह कार्यभार दिया गया। इस मौके पर अध्यक्ष उर्मिला देवी कवाड सहित पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित थे।

सरकारी अस्पताल में रोगी धक्के खाने को मजबूर
कोयम्बत्तूर. गरीब रोगियों के लिए सरकारी अस्पताल ही सहारा है, लेकिन यहां पर भी उन्हें चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसा ही एक वाकया मंगलवार को कोयम्बत्तूर के राजकीय अस्पताल में हुआ।
पोल्लाची के कट्टूर निवासी राजा(६०) को पेट में दर्द की वजह से कोयम्बत्तूर रैफर किया गया था।उसे कैंसर वार्ड में भर्ती कर लिया गया। साथ में देखरेख के लिएउसकी पत्नी शांति आई थी। दोपहर में अचानक राजा की तबीयत बिगड़ गई। उस समय वार्ड में कोई डॉक्टर नहीं था। शांति ने वहां मौजूद चिकित्साकर्मियों से सहायता की गुहार लगाई पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। वार्ड के अन्य रोगियों के परिजनों ने उसे आईसीयू में ले जाने की सलाह दी। पर नर्स व वार्ड बॉय ने सहयोग नहीं किया। इस पर शांति खुद स्ट्रेचर लाई लेकिन आईसीयू की जानकारी नहीं होने पर वह स्ट्रेचर को लेकर अस्पताल में इधर -उधर भटकती रही। बाद में अन्य लोगों ने उसकी सहायता की। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी किसी ने बना कर वॉयरल कर दिया।राजा की हालत में अब सुधार है। पर उसने बताया कि वे गरीब हैं । निजी अस्पताल में इलाज करा नहीं सकते और सरकारी अस्पताल में हमारी कोई सुनता नहीं। राजा ने बताया कि शांति को बहुत भाग दौड़ करनी पड़ी।

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