जिम्मेदार नहीं कर पा रहे सुरक्षा

वन विभाग के एक अधिकारी ने माना कि जिम्मेदारी अब दोहरी हो गई है। पहली हाथियों को आबादी की तरफ जाने से रोकना व दूसरी शिकारियों पर निगाह रखना। इसके लिए गश्ती दल बढ़ाए हैं।

By: Dilip

Updated: 08 Dec 2019, 12:25 PM IST

कोयम्बत्तूर.वन विभाग के एक अधिकारी ने माना कि जिम्मेदारी अब दोहरी हो गई है। पहली हाथियों को आबादी की तरफ जाने से रोकना व दूसरी शिकारियों पर निगाह रखना। इसके लिए गश्ती दल बढ़ाए हैं।

वन्य जीव प्रेमियों का कहना है कि वन विभाग अब तक न तो हाथियों के परम्परागत गलियारों की पहचान कर पाया है और नहीं उनकी सुरक्षा का इंतजाम।जंगल में होटल बिना वन विभाग की स्वीकृति से नहीं बन सकते। इसी तरह वन भूमि पर आबादी व खेतों का विस्तार किया जा रहा है, जबकि जंगल और आबादी के बीच बफर जोन होना चाहिए। इन सभी तथ्यों की अनदेखी का नतीजा है कि वन्यजीव व मानव के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।

गश्ती दल बढ़ाए
वन विभाग के एक अधिकारी ने माना कि जिम्मेदारी अब दोहरी हो गई है। पहली हाथियों को आबादी की तरफ जाने से रोकना व दूसरी शिकारियों पर निगाह रखना। इसके लिए गश्ती दल बढ़ाए हैं। सूचना तंत्र को और मजबूत किया गया है जिससे आबादी की ओर बढ़ रहे झुण्डों के बारे में पहले से ही लोगों को सतर्क किया जा सके। जंगलों के आसपास रहने वाले लोग तो फिर भी संभल जाते है पर जंगल में पर्यटक स्थलों के बारे में समस्या रहती है। जैसे ही यह सूचना मिलती है कि झुण्ड इधर की ओर बढ़ रहा है। सैलानी हाथियों को देखने के लिए उत्सुक हो जाते हैं। ऐसे में खतरा बढ़ जाता है। तीसरी समस्या युवाओं की है। कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जब हाथियों के झुण्ड का युवाओं ने बाइक से पीछा किया। उन्हें रोका गया तो पता लगा कि उनमें से कई शराब के नशे में थे। ये खतरनाक प्रवृत्ति है।

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