बड़ा और प्रतिष्ठित खरीदार मिल जाए तो उनकी ब्रॉडिंग बेहतर हो

टी बोर्ड ने भी माना है कि हरी पत्ती वाली चाय के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य कम से कम 30 रुपये किलो तय किया जाना चाहिए।चंूकि अभी 15 रुपए में पत्ती खरीदी जा रही है। किसानों का आरोप है कि इस अंतर का फायदा सिर्फ प्रोसेस इकाइयों को मिलता है। किसान के बारे में कोई सोचता नहीं।

By: Dilip

Updated: 23 May 2020, 12:59 PM IST

कोयम्बत्तूर. पर्यटन, चाय बागान व सब्जी की खेती नीलगिरि जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है पर लॉकडाउन के दौरान तीनों को संकट का सामना करना पड़ रहा है।

चाय उत्पादकों ने 2008 में मद्रास उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की थी। 2013 में अदालत ने सरकार को न्यूनतम मूल्य तय करने का निर्देश देते आदेश जारी किया था। लेकिन अभी भी मामला अदालत में लंबित है।

30 रुपए किलो समर्थन मूल्य चाहते हैं
टी बोर्ड ने भी माना है कि हरी पत्ती वाली चाय के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य कम से कम 30 रुपये किलो तय किया जाना चाहिए।चंूकि अभी १५ रुपए में पत्ती खरीदी जा रही है। किसानों का आरोप है कि इस अंतर का फायदा सिर्फ प्रोसेस इकाइयों को मिलता है। किसान के बारे में कोई सोचता नहीं।

यहां से भी नहीं मिला सहारा
नीलगिरि के चाय व्यापारी भारतीय सेना को चाय पत्ती की आपूर्ति के बारे में कई बार आग्रह कर चुके है। उनकी मांग है कि नीलगिरि की चाय को यदि बड़ा और प्रतिष्ठित खरीदार मिल जाए तो उनकी ब्रॉडिंग बेहतर हो सकती है।अभी असम के मुकाबले नीलगिरि चाय का मार्केट नाम मात्र का है।

Dilip Reporting
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