प्रवचन के श्रवण से शांत होती है आत्मा के कषायों की अग्नि

प्रवचन के श्रवण से शांत होती है आत्मा के कषायों की अग्नि

Kumar Jeevendra | Updated: 11 Jul 2019, 01:45:11 PM (IST) Coimbatore, Coimbatore, Tamil Nadu, India

आचार्य विजयरत्सेन सूरिश्वर ने बुधवार को गाजे-बाजे के साथ आर. एस. पुरम में चातुर्मास मंगल प्रवेश किया।

कोयम्बत्तूर. आचार्य विजयरत्सेन सूरिश्वर ने बुधवार को गाजे-बाजे के साथ आर. एस. पुरम में चातुर्मास मंगल प्रवेश किया। इससे पहले बहुफणा पाश्र्वनाथ जैन ट्रस्ट की स्थापना के रजत जयंती और जिनालय की प्रतिष्ठा के २३ वर्ष पूरे होने पर आयोजित चातुर्मास के निमित्त शुभ मुहूर्त में पू मार्केट स्थित वर्धमान ग्रैंड भवन से आचार्य सहित 14 साधु-साध्वियों की चातुर्मास प्रवेश यात्रा शुरू हुई। यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए आर एस पुरम पहुंची। ( Tamil Nadu ) बहुफणा पाश्र्वनाथ भगवान के दर्शन के पश्चात आई फाउंडेशन मैदान में धर्मसभा हुई।
धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य ने कहा कि जैसे पारसमणि के संग से लोहा स्वर्ण बन जाता है। वैसे ही सद्गुरू के संग से पापी व्यक्ति भी पावन बन जाता है। Coimbatore गुरु के जरिए हमें परमात्मा व धर्म का परिचय होता है। ( Tamil Nadu ) वर्ष मेंं तीन चातुर्मास होते हैंं लेकिन आषाढ़ के चातुर्मास श्रेष्ठ होते हैं। जिस प्रकार पानी पीने से गले की प्यास शांत होती है, वैसे ही प्रवचन वाणी सुनने से आत्मा के कषायों की अग्नि से पैदा होने वाली प्यास शांत होती है। आत्मा पर लगे कर्मों के मैल की सफाई होती है। धन के पीछे दौड़ते हुए धर्म के अवसर को व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। ( Tamil Nadu ) चातुर्मास में जैसे पानी की वर्षा होती है वैसे ही जिनवाणी की वर्षा होती है। Coimbatore वर्षा के जल में भींग कर हमें आत्मा में स्थायी परिवर्तन लाना चाहिए। चातुर्मास के मौके पर सिद्धितप, मास क्षमण आदि तत्पश्चर्याएं कराए जाएंगे। १२ जुलाई से प्रतिदिन सुबह नौ बज

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