स्वाध्याय से दूर होती है मन की चंचलता

स्वाध्याय से दूर होती है मन की चंचलता

Kumar Jeevendra | Updated: 26 Jul 2019, 11:47:15 AM (IST) Coimbatore, Coimbatore, Tamil Nadu, India

आचार्य रत्नसेन ने कहा कि स्वाध्याय से मन की चंचलता दूर होती है। मन में पैदा होने वाले शुभ भाव और धार्मिक मनोरथों की रक्षा के लिए स्वाध्याय एक श्रेष्ठ उपाय है।

कोयम्बत्तूर. आचार्य रत्नसेन ने कहा कि स्वाध्याय से मन की चंचलता दूर होती है। मन में पैदा होने वाले शुभ भाव और धार्मिक मनोरथों की रक्षा के लिए स्वाध्याय एक श्रेष्ठ उपाय है। आत्मभाव में रमणता के लिए साधु जीवन में प्रतिदिन स्वाध्याय जरुरी है।
आचार्य ने गुरुवार को Coimbatore राजस्थानी संघ भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि साधु की तरह श्रावक को भी प्रतिदिन स्वाध्याय करना चाहिए। स्वाध्याय श्रेष्ठ तप है। जीवन में क्षमाभाव जैसे अच्छे गुणों को आत्मसात किया हो लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों में वह दूर भी हो जाते हैं। जीवन भर अच्छे कार्य करने वाले व्यक्ति पर जब कोई मजाक में भी आरोप लगा देता है तो गुस्सा आ जाता है, तब क्षमा भाव अचानक चला जाता है। इस कारण संतों व महर्षियों ने स्वाध्याय पर बल दिया है। बार-बार वैराग्य पूर्ण धर्मग्रंथों का स्वाध्याय, पठन, पाठन चिंतन मनन से वैराग्य भाव सशक्त होता जाता है।
आचार्य ने कहा कि चंचल मन को साधने के लिए सदैव ज्ञान -ध्यान की प्रवृत्ति में लीन रहना चाहिए। मनरूपी अश्व को वश में करने के लिए स्वाध्याय अंकुश है। जिस प्रकार घोड़े हाथी लगाम या अंकुश से वश में आ जाते हैं उसी प्रकार स्वाध्याय से मन वश में आ जाता है। आचार्य ने बताया कि पांच प्रकार से स्वाध्याय संभव है।
गुरूओं के उपदेश श्रवण वाचना स्वरूप है। इसमें आने वाली शंका का समाधान पृच्छना स्वाध्याय है। धर्माेपदेश को कंठस्थ कर सुनाना परावर्तना स्वाध्याय और धर्मोपदेश का चिंतन-मनन कर उसे अपने तर्क से सिद्ध कर तत्व बोध का निश्चय कराना अनुप्रेक्षा स्वरूप स्वाध्याय है। जिनवाचन कर दूसरों को धर्म का उपदेश देना धर्मकथा स्वरूप स्वाध्याय है। तीर्थंकरों ने ज्ञान के आधार पर ही धर्मदेशना दी जिसे पूर्व आचार्य व महर्षियों ने ग्रंथों के रूप में संकलित किया।
जो श्रुत ज्ञान हमें प्राप्त हुआ वह परमात्मा के वचन हंैं। तत्व बोध से आत्मा में रहे कर्म बल का क्षय होता है और उत्तरोत्तर विकास कर आत्मा भी परमात्मा के समान अनंत ज्ञानी बन सकती है। २८ जुलाई को सुबह ९.१५ बजे माता-पिता के उपकार कर्तव्य विषय पर शिविर होगा। २९ जुलाई से आचार्य रामचंद्र सूरीश्वर की स्वर्गारोहण पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय कार्यक्रम शुरू होगा।

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