नवकार मंत्र ही श्रेष्ठ व सारभूत

जैन आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने कहा कि संसार में अनेक मंत्र हैं उन सभी में सर्वश्रेष्ठ व सारभूत मंत्र नवकार मंत्र ही है। इस महामंत्र में पांच परमेष्ठि को प्रणाम है।

By: Dilip

Published: 03 Dec 2019, 12:04 PM IST

कोयम्बत्तूर. जैन आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने कहा कि संसार में अनेक मंत्र हैं उन सभी में सर्वश्रेष्ठ व सारभूत मंत्र नवकार मंत्र ही है। इस महामंत्र में पांच परमेष्ठि को प्रणाम है। वह बहुफणा पाश्र्वनाथ जिनालय जैन मैन्योर में सोमवार को आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जब घर में आग लग जाती है तो व्यक्ति फर्नीचर, कपड़े, गद्दे आदि लेकर नहीं भागता वह केवल स्वर्ण आभूषण ,नकदी व महंगी वस्तु लेकर भागता है। अर्थात घर में अनेक वस्तुएं होने पर वह केवल सारभूत व हल्की वस्तुओं को ही पसंद करता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में पांच के अंक की अनेक वस्तुएं हैं। जैसे दुनिया में सबसे दुखी जीव नरक के हैं, उससे कम मनुष्य है। देवता सुखी हैं। देवताओं में पांच अनुत्तर विमानवासी देवता अति सुखी हैं। इसी प्रकार इंद्रियां भी पांच हैं। इन पर सयंम रख कर तरक्की के मार्ग पर आगे बढ़ा जा सकता है। इनक दुरुपयोग से आत्मा पतन मार्ग की ओर ले जाता है। इसी प्रकार पांच पापाचरण हैं इनमें हिंसा,झूठ, चोरी, सेवन व परिग्रह के जरिए आत्मा पापार्जन करती है। इन पांच पापों के कारण मिथ्यात्व, अविरति, प्रमाद, कषाय व योग हैं।
उन्होंने कहा कि मिथ्यात्व के कारण विपरीत बुद्धि हो जाती है। इसी कारण आत्मा चार गति में संसार में दीर्घकाल से विचरण कर रही है। पाप के आचरण से जीवात्मा को दुख की प्राप्ति होती है।
पांच इंद्रियों से पांच विषय से सुख का अनुभव होता है। स्पर्श, गंध, रुप, रस व शब्द। इनसे पांच कार्य पैदा होते हैं काल,स्वभाव, भविष्य, कर्म व पुरुषार्थ। आचार्य ने कहा कि जिनेश्वर भगवान के पांच प्रकार के कल्याणक होते हैं इनमें च्यवन, जन्म, दीक्षा, केवल ज्ञान व निर्वाण। आत्मा में पांच प्रकार के अंतराय हैं।
दानांतराय, लाभान्तराय,भोगान्तराय,उपभोगांतराय व वीरातंराय।
दान के पांच आभूषण है आनंद, अश्रु, रोमांच, बहुमान, प्रियवचन और अनुमोदना।
दान को यह पांच तत्व दूषित करते हैं। इनमें अनादर, विलंब, विमुखता, अप्रियवचन व पश्चाताप। इस प्रकार पांच प्रकार की अनेक वस्तुओं में सबसे महत्वपूर्ण व सारभूत पांच परमेष्ठि है। इनको किया वंदन आत्मा को शाश्वत सिद्धि प्रदान करता है।
महापूजन आज
राजस्थानी संघ भवन में मंगलवार सुबह नौ बजे उवसग्गहरं महापूजन होगा। पांच दिसम्बर को बहुफणा पाश्र्वनाथ से सर्वासिद्धि पाश्र्वनाथ अवलपुंदुराई के लिए छड़ी पालक संघ यात्रा शुरू होगी।

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