मन कभी तृप्त नहीं होता

jain acharya pravchan आचार्य विजय रत्नसेन सूरिश्वर ने कहा कि पेट की भूख तो भोजन करने से मिट जाती है लेकिन मन की भूख कभी तृप्त नहीं होती।

कोयम्बत्तूर. आचार्य विजय रत्नसेन सूरिश्वर ने कहा कि पेट की भूख तो भोजन करने से मिट जाती है लेकिन मन की भूख कभी तृप्त नहीं होती।
उन्होंने राजगुरु अपार्टमेंट स्थित Coimbatore जीरावाला पाश्र्वनाथ जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित pravchan करते हुए कहा कि जिस तरह सागर नदियों और श्मशान मुर्दों से तृप्त नहीं होता, वैसे ही मानव का मन कितना भी मिल जाए लेकिन तृप्त नहीं होता। इसलिए आत्मिक सुख व मन की शांति के लिए वीतराग परमात्मा ने इच्छाओं में सुख शांति का अभाव बताया है। ( Tamil Nadu ) उन्होंने कहा कि सुख इच्छा मुक्ति में है। अधिक धन आने से जीवन में पाप कार्यों की वृद्धि हो जाती है। धन के अभिमान में विवेक चक्षु बंद हो जाते हैं। ( Tamil Nadu ) आचार्य ने कहा कि मासांहार में जीव की हत्या होती है। अन्य को दुखी कर जीवन में सुख की कामना करना मूर्खता है। पश्चिमी शैली को अपनाने के कारण लोगों का शरीर का पाचन तंत्र कमजोर हो गया है जिसके कारण रोगों ने घेर लिया है। देर रात भोजन करना, रीति नीति के अनुसार जीवन शैली नहीं होना, इनके प्रमुख कारण हंै।
आर जी स्ट्रीट में आज प्रवेश
आचार्य रत्नसेन रविवार को सुबह आर जी स्ट्रीट में मंगल प्रवेश करेंगे। coimbatore प्रात 7 बजे स्नात्र महोत्सव, 9 .15 बजे प्रवचन होंगे। 8 जुलाई को सुबह नौ बजे महावीर स्वामी च्यवन कल्याणक भावयात्रा का संगीतमय कार्यक्रम होगा। 10 जुलाई को आरएस पुरम स्थित बहुफणा पाश्र्वनाथ जैन संघ भवन में चातुर्मास प्रवेश होगा।

कुमार जीवेन्द्र झा Incharge
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