जैन - बौद्ध संस्कृति का संगम

जैन - बौद्ध संस्कृति का संगम
जैन - बौद्ध संस्कृति का संगम

Dilip Sharma | Publish: Oct, 10 2019 01:32:25 PM (IST) Coimbatore, Coimbatore, Tamil Nadu, India

जापानी प्रतिनिधि मंडल ने जैन मंदिर पहुंचा - सर्वधर्म समभाव का दिया संदेश

आरएसपुरम स्थित शंखेश्वर जैन मंदिर में गुरूवार को अद्भुत नजारा देखने को मिला। यहां जैन व बौद्ध संस्कृति का संगम हुआ। जापान के बौद्ध अनुयायी संस्था रीसोकोसाई काई का 17 सदस्यों का प्रतिनिधि मंडल ने जैन मंदिर के न केवल दर्शन किए वरन उन्होंने जैन संस्कृति को भी जाना।

कोयम्बत्तूर. आरएसपुरम स्थित शंखेश्वर जैन मंदिर में गुरूवार को अद्भुत नजारा देखने को मिला। यहां जैन व बौद्ध संस्कृति का संगम हुआ। जापान के बौद्ध अनुयायी संस्था रीसोकोसाई काई का 17 सदस्यों का प्रतिनिधि मंडल ने जैन मंदिर के न केवल दर्शन किए वरन उन्होंने जैन संस्कृति को भी जाना। इस मौके पर सर्वधर्म समभाव का संदेश भी दिया गया। प्रतिनिधि मंडल के स्वागत में जैन समाज के साथ मुस्लिम, ईसाई, सिख व हिंदू धर्म के प्रतिनिधियों ने भी उनका स्वागत किया। सभी ने एक दूसरे को अपने धर्मों के ग्रंथ भेंट किए। जैन साध्वी मंडल ने मंगलाचरण किया। जापान से आए दल के लोगों ने बौद्ध परम्परा अनुसार पूजा की साथ ही सभी ने साम्प्रदायिक सौहार्द प्रेम व भाईचारे का संदेश दिया गया।

जापान से आए बोध अनुयायी संस्था रीसो कोसई काई की कार्यकारी अध्यक्ष कोशो निवानो के नेतृत्व में भारत यात्रा पर आया प्रतिनिधि मंडल ने गुरूवार को कोयम्बत्तूर के आरएसपुरम स्थित शंखेश्वर जैन मंदिर पहुंचा। यहां पहुंचने पर अतिथि देवो भव: की परंपरा के तहत महिलाओं ने तिलक लगा कर जापान से आए दल के प्रतिनिधियों का स्वागत किया। जैन समाज के अंबरीश शाह व नरेन्द्र रांका सहित अन्य पदाधिकारियों ने दल का स्वागत किया। दल के लोगों ने जैन मंदिर में भगवान के दर्शन किए।
जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ शंखेश्वर पाश्र्वनाथ मंदिर में दल के मुखिया कोसो निवानो सहित अन्य पदाधिकारियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। रांका ने अपने स्वागत भाषण में जापानी संस्था का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि जैन धर्म व बौद्ध धर्म की शिक्षाओं में सत्य ,अंहिसा ईमानदारी, ब्रह्मचर्य, परिग्रह जैसी कई समानताएं हैं। जैन धर्म का देश में तथा बौद्ध धर्म का देश से बाहर मलेशिया, ताईवान, जापान लंका आदि देशों तक पहुंचा जां आज भी बौद्ध मठ व उनके अनुयायी धर्मदेशना करते हैं।
निवानो जापान की संस्था (आरआईएसएसओ कोशाई -काई )आर.के.के.संस्था की युवाचार्य हैं। संस्था से 50 लाख लोग जुड़े हुए हैं। 20 देशों में इसके कार्यालय व २०० मंदिर व केन्द्र हैं। इस अवसर पर जैन समाज के कनकभाई अभयचंद, चंपालाल बाफना, रमेश सूतलिया, गुलाबचंद मेहता, निर्मल रांका सहित विभिन्न सम्प्रदाय के लोग मौजूद रहे। संचालन भारतीय विद्या भवन अध्यक्ष डॉ कृष्णराज वानव रायर ने की।

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