जैन-बौद्ध संस्कृति का संगम

जैन-बौद्ध संस्कृति का संगम
जैन-बौद्ध संस्कृति का संगम

Dilip Sharma | Publish: Oct, 11 2019 01:04:10 PM (IST) Coimbatore, Coimbatore, Tamil Nadu, India

दिया सर्वधर्म समभाव का संदेश - आरएसपुरम स्थित शंखेश्वर जैन मंदिर में गुरुवार को जैन और बौद्ध संस्कृति का समागम के साथ ही सर्वधर्म समभाव का नजारा देखने को मिला। जापान की बौद्ध संस्था रीसोकोसाई काई के १७ सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने जैन मंदिर में न केवल दर्शन किए वरन उन्होंने जैन संस्कृति को भी जाना।

कोयम्बत्तूर. आरएसपुरम स्थित शंखेश्वर जैन मंदिर में गुरुवार को जैन और बौद्ध संस्कृति का समागम के साथ ही सर्वधर्म समभाव का नजारा देखने को मिला। जापान की बौद्ध संस्था रीसोकोसाई काई के १७ सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने जैन मंदिर में न केवल दर्शन किए वरन उन्होंने जैन संस्कृति को भी जाना। इस अवसर पर जैन समाज के साथ मुस्लिम, ईसाई, सिख व हिंदू धर्म के प्रतिनिधियों ने भी उनका स्वागत किया। सभी ने एक दूसरे को अपने धर्मों के ग्रंथ भेंट किए। जैन साध्वी मंडल ने मंगलाचरण किया। जापान से आए दल के लोगों ने बौद्ध परम्परा अनुसार पूजा की। साथ ही सभी ने सर्वधर्म समभाव के संदेश के साथ साम्प्रदायिक सौहार्द्र, प्रेम व भाईचारे के प्रचार-प्रसार पर बल दिया। जापान की बौद्ध संस्था रीसो कोसई काई की कार्यकारी अध्यक्ष कोशो निवानो के नेतृत्व में भारत यात्रा पर आया प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को कोयम्बत्तूर के आरएसपुरम स्थित शंखेश्वर जैन मंदिर पहुंचा। अतिथि देवो भव: की परंपरा के तहत महिलाओं ने तिलक लगाकर दल के प्रतिनिधियों का स्वागत किया। जैन समाज के अंबरीश शाह और नरेन्द्र रांका सहित अन्य पदाधिकारियों ने दल का स्वागत किया। दल के लोगों ने जैन मंदिर में भगवान के दर्शन किए। जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ शंखेश्वर पाश्र्वनाथ मंदिर में दल के मुखिया कोसो निवानो सहित अन्य पदाधिकारियों को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। रांका ने स्वागत भाषण में जापानी संस्था का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि जैन धर्म व बौद्ध धर्म की शिक्षा में सत्य, अंहिसा ईमानदारी, ब्रह्मचर्य, परिग्रह जैसी कई समानताएं हैं। जैन धर्म का देश में तथा बौद्ध धर्म का देश से बाहर मलेशिया, ताईवान, जापान श्रीलंका आदि देशों तक पहुंचा जहां आज भी बौद्ध मठ व उनके अनुयायी धर्मदेशना करते हैं। निवानो जापान की संस्था (आरआईएसएसओ कोशाई-काई) आर.के.के.संस्था की युवाचार्य हैं। संस्था से ५० लाख लोग जुड़े हुए हैं। २० देशों में इसके कार्यालय, २०० मंदिर व केन्द्र हैं।
इस अवसर पर जमाते इस्लाम हिंद के हाकिम, इसाई समाज से फादर गिलीस वेलियाना, हिंदू समाज से परमेश्वर स्वामी, सिख समाज से गुरुप्रीत सिंह सहित जैन समाज के कनकभाई अभयचंद, चंपालाल बाफना, रमेश सूतलिया, गुलाबचंद मेहता, निर्मल रांका सहित विभिन्न सम्प्रदाय के लोग मौजूद रहे। संचालन भारतीय विद्या भवन अध्यक्ष डॉ. कृष्णराज वानव रायर ने किया।

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