संसार में व्यक्ति समभाव को भूला

संसार में व्यक्ति समभाव को भूला
प्रसन्न रहना चाहते हैं तो दूसरों को खुश रखना सीखो

Dilip Sharma | Publish: Oct, 10 2019 03:14:23 PM (IST) Coimbatore, Coimbatore, Tamil Nadu, India

-मुनि हितेशचंद्र विजय के प्रवचन - मुनि हितेशचंद्र विजय ने कहा कि आज संसार में व्यक्ति समभाव व कर्तव्य परायणता को नकारता जा रहा है। गुरु भगवंत जिसे भूलने को कहते हैं उसे हम अपनाते जा रहे हैं

कोयम्बत्तूर. मुनि हितेशचंद्र विजय ने कहा कि आज संसार में व्यक्ति समभाव व कर्तव्य परायणता को नकारता जा रहा है। गुरु भगवंत जिसे भूलने को कहते हैं उसे हम अपनाते जा रहे हैं। गुरु की नहीं सुन रहे और परमात्मा की देशना को भी नहीं मान रहे। सांसारिक मोह में इतने जकड़ चुके हैं कि मोह व स्वार्थ के अतिरिक्त कुछ दिखाई नहीं देता।
यह बात मुनि हितेशचंद्र विजय ने कही। वे यहां आरजी स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में नवपद ओली आराधना के पंचम दिवस पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि मोह ऐसा नशा है जिसमें व्यक्ति अपने विशुद्ध आत्म स्वरूप को भूलकर भौतिक सुखों की लालसा में भटक रहा है। संसार की प्रत्येक वस्तु के मोह का अंतिम परिणाम सुखद नहीं है। संपत्ति मोह प्राय: हत्या का कारण बन जाती है। सगे संबंधी भी हमेंं दुख देते हैं। जीवन मृत्यु दिखाकर और अधिक जीवित रहने की इच्छा मानव मस्तिष्क को खोखला बना देती है। प्रसन्नता का फूल मुरझा कर कांटा बन जाता है।
मोह के त्यागे बिना सुख शांति की आशा करना स्वप्न में करोड़पति बनने जैसा है। मोह को त्याग कर अंतर आत्मा को सुख की खोज करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ज्ञान से शरीर व मकान जैसे है वैसे ही माने जाते हैं लेकिन मोहनीय कार्यों से मैं व अपनत्व भ्रांति होती है जिससे जीव सुखी व दुखी हो सकता है। मोह के कारण अच्छे बुरे की कल्पना करता है। जब जीव परमार्थ की ओर आकर्षित होता है तब उसमें तीव्र मोहकर्म का उदय नहीं होता। सिद्धाचल भाव यात्रा के दरमियान सिद्धाचल गिरी की महिमा का वर्णन किया गया।

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