जन्म-जन्मांतर का साथी सिर्फ धर्म

दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जिनके पास वैभव तो है लेकिन धर्म में आस्था नहीं है। धन कितना ही आ जाए लेकिन धर्म को कभी नहीं भूलना चाहिए। केवल धर्म ही ऐसा साथी है जो जन्म जन्मांतर तक साथ देता है।

कोयम्बत्तूर. दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जिनके पास वैभव तो है लेकिन धर्म में आस्था नहीं है। धन कितना ही आ जाए लेकिन धर्म को कभी नहीं भूलना चाहिए। केवल धर्म ही ऐसा साथी है जो जन्म जन्मांतर तक साथ देता है। यह बात जैन मुनि हितेशचंद्र विजय ने कही। वह यहां मुनि सुव्रतनाथस्वामी जिन मंदिर में ध्वजारोहण समारोह के दौरान आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि धन जीवन की छाया है जो हर पल हमारे साथ चलता है। धन पाना हमारा पुण्य है इसे धार्मिक कार्यों के लिए भी यथा शक्ति खर्च करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी को पाना सरल है लेकिन उसे धार्मिक कार्य में लगाना कठिन होता है। कई लोग जो वैभव आदि पा लेते हैं लेकिन उनकी धर्म में रुचि नहीं होती।
उन्होंने प्रवचन के दौरान कहा कि ध्वजा के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि ध्वजा का किसी की भी प्रसिद्धि में अहम योगदान होता है। इस मौके पर बागरेचा परिवार का बहुमान किया गया। इसके बाद राकेश बाफना आदि ने जैन मुनि संघ की अगुवानी की। इस अवसर पर दिव्यचंद्र विजय मुनि के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में जीव दया के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

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