मदुरै. तेरापंथ धर्मसंघ के प्रमुख आचार्य महाश्रमण की निश्रा में बुधवार को यहां भगवान महावीर जन्म कल्याण महोत्सव का आयोजन हुआ। आचार्य ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सच्चाई की साधना करनी चाहिए।
शहर के त्यागराज कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आचार्य ने कहा कि दुनिया में कई तरह के दान प्रचलन में हैं लेकिन शास्त्रों में अभयदान को श्रेष्ठ बताया गया है। आचार्य ने कहा कि अभयदान देने का मतलब है कि अहिंसा को स्वीकार कर लेना। आचार्य ने कहा कि दुनिया में सत्य वचन का महत्व है। आचार्य ने कहा कि जिस सत्य के साथ अनवद्धता, निर्वद्धता और अहिंसा जुड़ जाती है वह निर्वद्ध सत्य हो जाता है। आचार्य ने कहा कि तप के अनेक भेद हैं जिसमें बह्मचर्य को श्रेष्ठ बताया गया है। दुनिया में बहुत से पुरुष हुए, उत्तम पुरुष भगवान महावीर थे। उन्होंने अभयदान दिया। वे निर्वद्ध सत्य के आराधक थे। उन्होंने केवल ज्ञान को प्राप्त किया और सर्वज्ञ बन गए। आचार्य ने कहा कि अनेकांतवाद भगवान महावीर से जुड़ा सिद्धांत है। सच्चाई को पाने के लिए अनेकांतवाद की आराधना आवश्यक है। इसके लिए दुराग्रह छोड़ें। आचार्य ने कहा कि सच्चाई किसी पंथ, ग्रंथ या संत से मिले उसका सम्मान करें। दुराग्रह सच्चाई का बंद द्वार है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जैसे कर्म करता है वैसे फल भोगता है। भगवान महावीर के जीवन को जानने के लिए आगमों का अध्ययन हो तो जैन दर्शन को जानने में आगे बढ़ा जा सकता है।

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