रोजगार की चिन्ता से हलकान हैं प्रवासी कामगार

कोरोना से बचाव के लिए 21 दिन के लॉकडाउन ने प्रवासी कामगारों की चिन्ता बढ़ा दी है। उनके सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है।

कोयम्बत्तूर. कोरोना से बचाव के लिए २१ दिन के लॉकडाउन ने प्रवासी कामगारों की चिन्ता बढ़ा दी है। उनके सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है।
कोयम्बत्तूर में बड़ी संख्या में पूर्वोत्तर के राज्यों सहित उत्तर प्रदेश, बिहार राजस्थान के युवा फर्नीचर, बड़े भवनों की रंगाई -पुताई से लेकर प्लाई की बड़ी दुकानों, होटल -रेस्टोरेंटों में काम करते हैं। इनकी कमाई से ही सैकड़ों किलोमीटर दूर रह रहे परिवार का खर्चा चलता है। वे यहां कम से कम पैसों में काम चला कर वेतन का अधिकांश हिस्सा परिवार को भेज देते हैं। इनकी चिन्ता है कि अब व्यापार ठप प्राय: हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में किराए के कमरों में रह रहे देश के विभिन्न हिस्सों के कामगारों का कहना है कि व्यवसाय को वापस खड़ा होने में वक्त लगेगा तब तक उन्हें काम मिलेगा या नहीं।
काम की दिक्कत हो सकती है

कोयम्बत्तूर में कई सालों से इंटीरियर का काम कर रहे हैं। पूरे वर्ष कम -ज्यादा काम मिलता रहा है। कोरोना के बाद हालात काम के लिहाज से मुश्किल साबित हो सकते हैं। अभी तो यही प्रार्थना कर रहे है कि कोरोना से देश सुरक्षित रहे, जितनी जल्दी हो सके इस विपदा से छुटकारा मिल जाए।

शिव सिंह, इंटीरियर , नोखा. राजस्थान
अब हालात ऊपर वाले के हवाले
कोयम्बत्तूर में रंग पेंट करने वालों के लिए रोजगार मिल जाता है। साल में सात -आठ माह यहां काम करते हैं। बाकी वक्त खेती -बाड़ी, घर -परिवार के साथ गुजारते हैं। पैसा भी ठीक मिलता है। पर अब कोरोना की वजह से रोजगार भी ठंडा हो सकता है। अब तो सब कुछ ऊपर वाले के हवाले हैं।
सर्वेश कुमार.पेंटर. गोरखपुर.उत्तर प्रदेश
पहले कोरोना से निपटा जाए
मंदी के बावजूद कोयम्बत्तूर में काम मिल रहा था। नए प्रतिष्ठान भी खुल रहे थे। यहां नई दुकान में फर्नीचर और डेकोरेशन पर लाखों खर्च किया जाता है। अब तक तो रोजगार बढिय़ा मिल रहा था, पर अब कोरोना का असर तो पड़ेगा ही। फिलहाल तो कोरोना के कारण जान सांसत में है। देखते हैं, आगे क्या होता है।
महेन्द्र सिंह. फर्नीचर कामगार.जोधपुर

मंदी के बाद महामारी
कोयम्बत्तूर प्लाई और हार्डवेयर का बड़ा बाजार है। पूरे प्रदेश में यहां से माल सप्लाई होता है। थोक हो या रिटेल काम अच्छा है। प्लाई की दुकान पर पं. बंगाल के युवा अच्छी संख्या में रोजगार पा रहे हैं। तमिल भी बोल लेेते है। पहले तो मंदी और अब कोरोना ने संकट में डाल दिया है। रोजगार पर असर तो साफ दिख रहा है।
सुभाष बेरा
प्लाई कामगार.कोलकाता


फिलहाल तो फंसे हुए हैं
राजस्थान के कई जिलों के लोग कोयम्बत्तूर में काम करते हंै। यहां के खान-पान, भाषा और भविष्य में रोजगार की संभावना जानने गांव के लोगों के साथ आ गया। तमिलनाडु को देखने की इच्छा थी। पर अब 21 दिन के लॉकडाउन के कारण कहीं घूमने-फिरने नहीं जा सकते।फिलहाल तो कोरोना की चिन्ता है।
हुकम सिंह. नाचना. जैसलमेर

Rahul sharma Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned