माओवादी जयन्ना और सुन्दरी की तलाश तेज, दो लाख का इनाम घोषित

कर्नाटक के दो खतरनाक माओवादियों की तलाश में तमिलनाडु और केरल की सीमा के गांवों में जुटी पुलिस और एजेन्सियों को शुक्रवार तक कोई सुराग नहीं मिला है।

कोयम्बत्तूर. कर्नाटक के दो खतरनाक माओवादियों की तलाश में तमिलनाडु और केरल की सीमा के गांवों में जुटी पुलिस और एजेन्सियों को शुक्रवार तक कोई सुराग नहीं मिला है। अब नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेन्सी (एनआईए) nia ने माओवादियों की जानकारी देने पर दो लाख रुपए इनाम की देने की घोषणा की है। Maoist एनआईए ने मेट्टूपालयम इलाके के गावों में माओवादी कन्नड दलम के प्रमुखजयन्ना व इसकी सहयोगी सुन्दरी के फोटो वाले पोस्टर लगाए हैं।

माना जा रहा है Coimbatore कि दोनों तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल सीमा के गावों में छिपे हो सकते हैं। कोयम्बत्तूर और नीलगिरि जिले के कई गांव केरल और कनार्टक की सीमा से सटे हैं। वेस्टर्न घाट के घने जंगलों के बीच कई ऐसे इलाके हैं, जहां पुलिस का पहुंच पाना मुश्किल हैं। ऐसे में इनका सुराग लगाने के लिए दो लाख two lakhs Rs का ईनाम देने की घोषणा की गई है।मेट्टूपालयम सहित वेल्लियांकडु, पिल्लूर बांध और पट्टी सलाई के अलावा केरल के मुली इलाके में दोनों माओवादियों के पोस्टर लगाए जा चुके हैं। जयन्ना और सुन्दरी ने वर्ष 2014 में चर्चा में आए थे। दोनों ने पुलिस अधिकारी एबी प्रमोद के घर में घुस कर जान से मारने की धमकी दी। प्रमोद को बंदूक की नोंक पर पुलिस सेवा से इस्तीफा देने के लिए धमकाया और जाते जाते अधिकारी की बाइक को आग के हवाले कर दिया। बताया जाता है कि जयन्ना उर्फ महेश उर्फ जॉन उर्फ मरप्पा रायचूर जिले का रहने वाला है। ( Tamil Nadu ) जबकि सुंदरी उर्फ गीता उर्फ सिंधु) कर्नाटक के दक्षिण की है। पिछले साल भी एनआईए ने जनता को सतर्क करने के विलए इसी तरह के पोस्टर लगाए थे।

माओवादियों को नीलगिरि में कैम्प कायम करने में आदिवासियों से सहायता मिली है। इसकी वजह आदिवासी आज भी घोर गरीबी में जीवन यापन को मजबूर हैं। उन्हें समाज के साथ प्रशासन के उत्पीडऩ का शिकार होना पड़ता है। शोषित आदिवासियों को माओवादी बरगला चुके हैं। उन्ही की सहायता से माओवादियों को न केवल रसद मिल रही है । coimbatore बल्कि पुलिस की किसी भी गतिविधि की जानकारी भी मिल जाती है। ( Tamil Nadu ) वे पुलिस के आने से पहले ही अपना ठिकाना बदल लेते हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन समय-समय पर यह दावा करता है कि वह आदिवासियों का दिल जीतने के लिए कोशिशकरता रहता है। इसी सिलसिले में कई जगहों पर उनकी समस्याएं जानने व समाधान के लिए शिविर लगाए गए। coimbatore वहां मिली शिकायतों को निवारण के लिए सम्बन्धित विभागों को भेजा गया पर सरकारी विभागों ने समाधान करने में तत्परता नहीं दिखाई। माओवादियों ने इसी का फायदा उठाया। coimbatore प्रशासन सिर्फ शिकायतें सुनता है । समाधान नहीं करता। ( Tamil Nadu ) इसके उलट माओवादी रुपए आदि देकर उनकी सहायता करते हैं। आदिवासियों को परेशान करने वालों को धमकी देकर चुप कर देते हैं। इसी वजह से माओवादी आदिवासियों का दिल जीतने में सफल होते दिखाई दे रहे हैं।

नीलगिरि में कई साल पहले ही कायम कर चुके कैम्प

माओवादी नीलगिरि के घने जंगलों में अपना कैम्प कायम कर चुके हैं। यह खुलासा खुद पुलिस ने करीब पांच साल पहले तैयार रिपोर्ट में किया था। ( Tamil Nadu ) वेस्टर्न घाट के घने जंगल व पहाड़ों में कई इलाके ऐसे हैं जहां आज भी पहुंच पाना मुश्किल है। रास्ते तो दुर्गम है ही। साथ ही जंगली जानवरों का भय पुलिस व वन विभाग के कर्मचारियों को भी घने जंगल में जाने से रोकता है। coimbatore बड़ा खतरा हाथी, बाघ, पैंथर, भालू व अन्य हिसंक जीव हैं।

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कुमार जीवेन्द्र झा Incharge
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