24 मार्च -6 मई के बीच चोरी , दुष्कर्म, हत्या का एक भी मामला नहीं हुआ दर्ज

कोरोना संकट के दौरान पुलिसकर्मियों को अन्य दिनों की तुलना में हॉर्ड ड्यूटी करनी पड़ रही है, पर वे खुश है। उन्हें अब हत्या, मारपीट, चोरी ,डकैती, छेड़छाड़ या दुष्कर्मजैसे मामलों की जांच के लिए नहीं जाना पड़ रहा।

By: brajesh tiwari

Published: 10 May 2020, 01:37 PM IST

कोयम्बत्तूर. कोरोना संकट के दौरान पुलिसकर्मियों को अन्य दिनों की तुलना में हॉर्ड ड्यूटी करनी पड़ रही है, पर वे खुश है। उन्हें अब हत्या, मारपीट, चोरी ,डकैती, छेड़छाड़ या दुष्कर्मजैसे मामलों की जांच के लिए नहीं जाना पड़ रहा। क्योंकि लॉकडाउन के कारण अपराध दर नाममात्र को रह गईहै।अपराधी किस्म के लोगों को भी कोरोना का डर है। वे भी छिपे हुए हैं।कोयम्बत्तूर जिले के ग्रामीण इलाकों में न केवल अपराध बल्कि हादसों में भारी कमी आई है।

चोरी -डकैती शून्य
जिला पुलिस के 24 मार्च और 6 मई के बीच उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस एक माह और १२ दिन की अवधि के बीच सिर्फ एक हत्या का मामला दर्जहुआ है। एक गंभीर व १० सामान्य मारपीट की रिपोर्ट हुईहै, जबकि १३ फरवरी व २४ मार्चके दौरान जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में तीन हत्या, दो हत्या के प्रयास, चार बलवे के मामले और २८ मारपीट की घटनाएं हुईथी।इसी तरह 13 फरवरी से 24 मार्च तक एक डकैती, पांच चोरी, सात चेन स्नैचिंग, एक घर तोड़ कर घुसने के मामले दर्ज हुए पर 24 मार्च और 6 मई के बीच इस तरह के एक भी मामला सामने नहीं आए हैं।

महिला उत्पीडऩ की कोई रिपोर्ट नहीं
महिलाओं और लड़कियों के साथ होने वाले अपराध भी कम हुए हैं। 13 फरवरी से 24 मार्च की अवधि के दौरान एक बलात्कार, चार पास्को अधिनियम के तहत रिपोर्टहुईहै। जबकि लॉकडाउन के दौरान बलात्कार छेड़छाड़, अपहरण, दहेज उत्पीडऩ का एक भी मामला सामने नहीं आया है।

आत्महत्या के मामले आधे से भी कम
प्रदेश में आत्महत्या की दर अधिक है। लॉकडाउन से पहले की अवधि में कोयम्बत्तूर जिले के ग्रामीण इलाकों में 79 लोगों ने आत्महत्या की थी।इसकी तुलना में लॉकडाउन के दौरान 32 लोगों ने अपना जीवन समाप्त कर लिया। यह पुलिस के साथ-साथ समाज के लिए चिन्ता का विषय है।

घातक हादसों में कमी
ग्रामीण क्षेत्रों में घातक दुर्घटनाओं में भी कमी आई है। लॉकडाउन के दौरान हादसों में दो लोगों की मौत हुई है। 23 दुर्घटनाएं हुईपर ये घातक नहीं थी। जबकि 13 फरवरी-मार्च 24 की अवधि में 42 घातक दुर्घटनाओं में 44 लोग मारे गए थे । ग्रामीण क्षेत्रों में 18 7 सामान्य हादसे हुए थे। जिला पुलिस अधीक्षक सुजीत कुमार ने माना है कि अपराध व दुर्घटना दर में गिरावट का कारण लॉकडाउन हैं।

brajesh tiwari Desk
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