आसान नहीं यातायात जाम से मुक्ति

समस्या

  • शहर की सड़कें बढ़ते वाहनों का दबाव झेलने लायक नहीं
  • साल भर में 1.22 लाख वाहन बढ़े, 10 हजार नए वाणिज्यिक वाहन भी जुड़े
  • पिछले साल अगस्त महीने में 15.94 लाख निजी वाहन थे शहर में
  • इस साल शहर में अगस्त के अंत में 17.16 लाख निजी वाहन थे

कोयम्बत्तूूर. शहर की सड़कों पर वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण यातायात जाम की समस्या गंभीर होती जा रही है। शहर की सड़के वाहनों की संख्या में होने हर साल होने वाली वृद्धि को झेलने की स्थिति में नहीं है। परिहवन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक साल के दौरान शहर की सड़कों पर 1.22 लाख से ज्यादा निजी गैर वाणिज्यिक वाहन आए। निजी वाहनों की संख्या में वृद्धि का असर व्यस्ततम अवधि के दौरान सबसे ज्यादा दिखता है। सुबह 8 से 10 और शाम में 5 से 7 बजे के बीच कई चौराहों और प्रमुख मार्गों पर यातायात को नियंत्रित करने के लिए करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक शहर में हर साल निजी वाहनों की संख्या बढ़ रही है। अगस्त 2018 में शहर में 15.94 लाख निजी दुपहिया व चार पहिया वाहन थे जबकि साल भर बाद ही अगस्त 2019 में यह संख्या बढ़कर 17.16 लाख हो गई। साल भर में 10 हजार वाणिज्यिक वाहन भी सड़कों पर आए। यातायात पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि व्यस्ततम अवधि में जाम की समस्या से निपटने के लिए ड्यूटी पर उपलब्ध सभी कर्मचारियों को तैनात किया जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम जितना संभव है, उतना प्रयास कर रहे हैं। अविनाशी रोड, तिरुचि रोड और सेल्वापुरम इलाकों में कई जगहों पर यातायात को नियंत्रित करने के लिए निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को भी तैनात किया गया है।
जानकारों का कहना है कि मेट्टूपालयम रोड जैसे कुछ इलाकों में सड़कों के किनारे हुए अतिक्रमण को हटाकर भी स्थिति सुधारी जा सकती है। इसके साथ ही सिंगनल्लूर जैसे इलाकों में यातायात के दबाव को कम करने के लिए नए फ्लाई ओवर का निर्माण भी तेजी से किए जाने की जरुरत है। जानकारों का कहना है कि बढ़ते वाहनों के अनुपात में यातायात सुविधाओं का विकास नहीं होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। जानकारों का कहना है कि जिले में वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण शहर ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी लेकिन ढांचागत सुविधाओं के विकास पर उतना ध्यान नहीं दिया। जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक बेहतर बनाकर कुछ हद तक यातायात के दबाव को कम किया जा सकता है। साथ ही यातायात पुलिस को सुबह और शाम के समय व्यस्ततम अवधि में जाम की समस्या से निपटने के लिए अधिक संसाधानों से लैस किए जाने की आवश्यकता है।
पार्किंग की समस्या भी
शहर में वाहनों की संख्या बढऩे के साथ ही पार्किंग को लेकर भी समस्या बढऩे लगी है। पुराने वाणिज्यिक इलाकों में वाहनों की पार्किंग ग्राहकों व दुकानदारों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
पुलिस की समस्या: 30 फीसदी पद रिक्त
नगर यातायात पुलिस विभाग में स्वीकृत पद रिक्तहोने के कारण भी परेशानी हो रही है। शहर में यातायात पुलिस के लिए स्वीकृत 323 पदों मेंं से 99 पद रिक्तहैं। सिर्फ 224 पुलिसकर्मियों के सहारे काम चल रहा है।
लेनी पड़ रही है मदद
कर्मचारियों की कमी और कई इलाकों में पाइप लाइन और फ्लाई ओवर निर्माण कार्य के कारण यातायात को संभालने के लिए यातायात पुलिस को नगर पुलिस की मदद लेनी पड़ रही है। 70 से अधिक चौराहों पर नगर पुलिस मदद कर रही है।

Rajendra Vyas Editorial Incharge
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