कपड़ा मिलों को नहीं मिल रहे कामगार

लॉकडाउन में छूट के एक पखवाड़े बाद भी शहर सहित जिले में संचालित कपड़ा मिलों में उत्पादन पूरी क्षमता से नहीं हो पा रहा है।मिल मालिक आर्थिक संकट और कामगारों की कमी से जूझ रहे हैं। साउथ इंडिया स्पिनर्स एसोसिएशन ने कपड़ा मिल उद्योग पर कोरोना के असर के बारे में एक बयान जारी कर चिंता जताई है।

By: Dilip

Published: 01 Jun 2020, 04:27 PM IST

कोयम्बत्तूर. लॉकडाउन में छूट के एक पखवाड़े बाद भी शहर सहित जिले में संचालित कपड़ा मिलों में उत्पादन पूरी क्षमता से नहीं हो पा रहा है।मिल मालिक आर्थिक संकट और कामगारों की कमी से जूझ रहे हैं। साउथ इंडिया स्पिनर्स एसोसिएशन ने कपड़ा मिल उद्योग पर कोरोना के असर के बारे में एक बयान जारी कर चिंता जताई है।इसमें कहा गया है कि कोरोना संकट में राहत के बारे में वित्त मंत्रालय व रिजर्वबैंक ऑफ इंडिया की घोषणाओं से उम्मीद तो बंधी है पर जमीनी समस्याएं भी है।इनमें नकदी का प्रवाह कम होना और मजदूरों की कमी मुख्य है। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष जगदीश चंद्रन का कहना है कि दूसरे राज्यों के अधिकांश कामगार लॉकडाउन की वजह से घर लौट चुके हैं। जो बचे हैं वे भी घर जाने की जुगत में हैं।कामगारों की कमी का असर सीधे कपड़ा मिलों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कपड़ा मिलों में साठ से अस्सी फीसदी कामगार दूसरे राज्यों के हैं। उनमें से सत्तर फीसदी से अधिक अपने राज्यों के लिए रवाना हो गए हैं ।बचे हैं, उनमें से भी अधिकांश लौटने के लिए तैयार हैं। इस सबके बाद भी कई कपड़ा मिलों में परिचालन फिर से शुरू हो गया है। चंद्रन ने बताया कि अभी बीस से पच्चीस प्रतिशत कार्मिकों के साथ मिलें काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि हमें यकीन नहीं है कि जो कारीगर लौटे हैं वे वापस आएंगे या नहीं और आएंगे तो कब। हम नहीं जानते कि कामगारों की कमी से कैसे निपटा जाए। एसोसिएशन के अध्यक्ष एन मुरुगेसन का कहना है कि अगर प्रवासी श्रमिक वापस लौट आएंगे तो परिचालन सामान्य हो जाएगा। उन्होंने बताया कि बिजली बोर्ड ने हमसे नब्बे फीसदी शुल्क का भुगतान करने के लिए कहा और अप्रैल में एक भी इकाई का उपयोग नहीं करने पर भारी जुर्माना लगाया था।इस तरह के बिल मिल मालिकों पर एक अतिरिक्त बोझ साबित हो रहे हैं।

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