सेवा की मूर्ति हैं पंकज मुनि

सेवा, सरलता और सहृदयता का प्रतीक हैं। पंकज मुनि का जीवन गुरुजनों की सेवा में समर्पित रहा।

कोयम्बत्तूर. सेवा, सरलता और सहृदयता का प्रतीक हैं। पंकज मुनि का जीवन गुरुजनों की सेवा में समर्पित रहा। इसी के साथ-साथ उन्होंने आचार्य, उपाध्याय प्रर्वतक अन्य वरिष्ठ और छोटे साधुओं की सेवा का भी लाभ लिया। अपने जीवन को उन्होंने सेवा का पर्याय बना लिया। यह विचार पुनित मुनी ने साईं बाबा कालोनी में प्रवचन सभा के दौरान कहे। इस अवसर पर वरुण मुनि ने कहा कि आज मकर संक्रांति का पावन दिन है। यूं तो हर महीने मकर संक्रांति आती है, लेकिन मकर संक्रांति का पूरे भारत में विशेष महत्व है। यह हमें संदेश देती है कि हम भी अपने जीवन को बुराईयों से अच्छाईयों की ओर अधर्म से धर्म की ओर पाप से पुण्य की ओर लगाएं। यह ही वास्तविक जीवन की संक्रांति होगी। आज पंकज मुनि की दीक्षा जयंती भी है। उन्होंने अपना जीवन सेवा धर्म में लगाया। इस अवसर पर मधुर भजनों की भी प्रस्तुति दी गई।

brajesh tiwari Desk
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