...लालटेनवा बुझ गया हवा के झोंके से

...लालटेनवा बुझ गया हवा के झोंके से

Kumar Jeevendra | Updated: 04 Jun 2019, 12:58:54 PM (IST) Coimbatore, Coimbatore, Tamil Nadu, India

हास्यमेव जयते: देर रात तक बही हास्य की सरिता, श्रोताओं ने जमकर ठहाके लगाए

म्हारी करवा चौथ का चांद, साजन जल्दी घर आ जा..., लालटेनवा बुझ गया हवा के झोंके से..और घर का पूत कंवारा डोले, यजमानों के फेरा... सरीखी हास्य रचनाओं पर श्रोताओं ने जमकर ठहाके लगाए।

कोयम्बत्तूर. म्हारी करवा चौथ का चांद, साजन जल्दी घर आ जा..., लालटेनवा बुझ गया हवा के झोंके से..और घर का पूत कंवारा डोले, यजमानों के फेरा... सरीखी हास्य रचनाओं पर श्रोताओं ने जमकर ठहाके लगाए।
मौका था रविवार को शहर की प्रमुख साहित्यिक संस्था सृजन के तत्वावधान में तड़ागम रोड स्थित माहेश्वरी भवन में आयोजित हास्य कवि सम्मेलन- हास्यमेव जयते का, जहां मध्य रात्रि तक श्रोताओं ने हास्य की सरिता में जमकर गोते लगाए। कवियों ने राजस्थानी व हिंदी भाषा के माधुर्य को बखूबी पेश किया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से मौजूदा राजनीतिक हालात, सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव तथा समाज के कई पहलुओं को अनूठे अंदाज में हास्य-व्यंग्य के तीरों से भेदा। करीब चार घंटे चले हास्य कवि सम्मेलन में श्रोताओं ने जमकर ठहाके लगाए। कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर राजस्थान पत्रिका रहा।
कार्यक्रम का प्रारंभ इंदौर से आई कवियत्री डॉ. भुवन मोहिनी ने सरस्वती वंदना 'तेरा उच्चवास हो, शब्द के तार पर अर्थ का प्रकाश हो, जय हो शक्ति भगवती, रथवती सरस्वतीÓ के साथ किया।
मंदसौर से आए कवि मुन्ना बैट्री ने अपनी विशिष्ट शैली में आम आदमी को रोजमर्रा के जीवन में होने वाली परेशानियों को छुआ। उन्होंने अपनी रचनाओं- 'आएगा तो मोदी ही, जो जमानत पर हैं वह सवाल चौकीदार पर उठाते हैं.. के जरिए मौजूदा राजनीतिक हालातों पर व्यंग्य किए। उन्होंने 'समाज की बुराईयों की जानकारी है लेकिन देने को कोई तैयार नहीÓ रचना सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरी।
दिल्ली से आए सुदीप भोला ने फिल्मी गानों की धुन पर पैरोडी सुनाकर दर्शकों को खूब हंसाया। उन्होंने सैनिकों की शहादत व देशभक्ति से जुड़ी रचनाएं -'जलाएं एक दीया उनके नामÓ, 'वर्दियां...यह वर्दियां, जो वतन के वास्ते खून में सनी रहींÓ तथा 'शहीदों के गांव घर ही मंदिर तीरथ धामÓ सुना कर माहौल को भावुक कर दिया। उन्होंने विपक्ष पर तंज करते हुए 'वो लड़का आंख मारेÓ 'लालटेनवा बुझ गया हवा के झोंके सेÓ तथा विपक्षी गठबंधन पर कटाक्ष करते हुए 'यह बंधन तो स्वार्थ का बंधन हैÓ सुना कर श्रोताओं की तालियां बटोरी।
डॉ भुवन मोहिनी ने शृंगार रस की रचनाएं सुनाई। 'मैं भी गाऊं तुम भी गाओÓ 'प्यार की ऐसी बरसात कर दीजिएÓ, 'नैन से नैन यह क्या कह गए हम तुम्हारे हुए, तुम हमारे हुएÓ सुना कर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने प्रेम के बदलते स्वरुप पर 'मीरा प्यार के खातिर पी गई जहर का प्याला, आज की मीरा मदिरा पी कर उ ला ला उ ला ला...Óरचना सुना कर दाद बटोरी।
मुंबई के गौरव शर्मा ने समसामयिक रचनाएं सुना कर दर्शकों के खूब ठहाके लगवाए। मितव्ययी होने का उदाहरण '...कार में सीएनजी किट लगवाए...बीमारी तो ठीक हो गई लेकिन रूपया लाग्या पूरा पचास हजार...जैसी हास्य चुटकियां सुना कर दर्शकों को हंसा- हंसा कर लोटपोट कर दिया। शर्मा ने टीवी धारावाहिकों के दौरान पति-पत्नी के संवाद, विज्ञापनों के संदेश आदि के जरिए श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
बेंगलूरु के कवि आदित्य शुक्ला ने साहित्य व विज्ञान के मिश्रण को लेकर अपनी रचनाएं पेश की। 'मेरे गीतों पर झूमता जमाना, उनके दर्द को ही गुनगुनाता हूंÓ, 'प्राणों से प्यारी बेटियां, अब कुछ न दे बेटी से भर गई झोलियांÓ सुना कर खूब दाद पाई। 'जब तक है मोहलत मौज उड़ाते चलो...उतना ही जोड़ों जिससे चले गुजाराÓ को खूब वाहवाही मिली।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे अजमेर से आए बुद्धि प्रकाश दाधीच ने भी अपनी रचनाएं सुनाईं। उन्होंने राजस्थानी भाषा के माधुर्य को हास्य के जरिए प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। दाधीच ने राजनीति व हास्य के मिश्रण को पेश किया। जीवन में अर्थशास्त्र के महत्व को बताते हुए 'टका-टका, टकाटकÓ रचना सुना कर राजस्थानी संस्कृति की विशेषताएं बताईं।
उन्होंने 'म्हारी करवा चौथ का चांद, साजन जल्दी घर आ जा, घर में थाल बजा दे, कच्चा आम खिला देÓ सुनाई। दाधीच ने घर का पूत कंवारा डोले, यजमानों के फेरा.. के जरिए यजमान के यहां फेरे कराने जा रहे पंडित पिता के अविवाहित पुत्र की व्यथा को बयां किया। दाधीच ने 'बरसात में मकां जलते देखे हैं... लाइफ में फाइनेंस की प्रॉबल्म आए तो हर मित्र सुदामा हो जाता...Ó से मौजूदा हालातों पर कटाक्ष किया। इससे पहले सृजन संस्था अध्यक्ष श्रीगोपाल माहेश्वरी व सचिव गुलाब चंद मेहता सहित अन्य पदाधिकायिों ने कवियोंं का स्वागत किया व उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए।

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