मनुष्य जीवन में सोच ही सुख दुख का कारण

मनुष्य जीवन में सोच ही सुख दुख का कारण
मनुष्य जीवन में सोच ही सुख दुख का कारण

Dilip Sharma | Updated: 09 Oct 2019, 02:11:41 PM (IST) Coimbatore, Coimbatore, Tamil Nadu, India

कथा वाचक सूरत अमृते ने कहा कि मनुष्य के जीवन में दुख सुख का कारण उसकी अपनी सोच होती है।
मनुष्य की एक मु_ी में स्वर्ग है तो दूसरी मु_ी में नर्क। अगर वह सकारात्मक सोचता है तो उसका घर स्वर्ग बन जाता है और नकारात्मक सोचता है तो उसका जीवन नर्क हो जाता है।

सेलम. कथा वाचक सूरत अमृते ने कहा कि मनुष्य के जीवन में दुख सुख का कारण उसकी अपनी सोच होती है।
मनुष्य की एक मु_ी में स्वर्ग है तो दूसरी मु_ी में नर्क। अगर वह सकारात्मक सोचता है तो उसका घर स्वर्ग बन जाता है और नकारात्मक सोचता है तो उसका जीवन नर्क हो जाता है।
वह सेलम के नारायण नगर के जैन भवन में गायत्री परिवार की ओर से प्रज्ञा पुराण कथा के दौरान धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भगवान विष्णु और देवर्षि नारद के प्रसंग में बताया कि मनुष्य अचिंत चिंतन करता है तो उसके जीवन में बेचैन हो जाता है। अगर मनुष्य को सुखी रहना है तो अपनी सोच को बदलना होगा। जितने भी महान व्यक्ति हुए हैं वह सब अपनी सोच के कारण हुए।
स्वामी विवेकानंद के विचारों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि दुनिया में दृृष्टिकोण नारी में देवी देखता है। दुर्गा सरस्वती लक्ष्मी काली महागौरी वही लक्ष्मी है। नारी ही सरस्वती है। बुरी सोच का फल बुरा होता है। कर्मों के फल से कोई नहीं बच सकता। कथा के बाद जैन भवन में दीप यज्ञ संपन्न हुआ। श्रीमद् भागवत प्रज्ञा पुराण की कथा से उत्साह, उल्लास, उमंग का विचार मिलता है। युवा पीढ़ी को नशा मुक्त करना, स्वच्छता अभियान आदि देश की जरूरत है। इस मौके पर करीब 50 युवाओं ने नशा छोडऩे का संकल्प लिया। संयोजन मंडली से जुड़े बबलू शर्मा ने कथा आयोजन में सहयोग के लिए सभी का आभार जताया।

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