रेत माफिया ने खोदे रास्ते, बन गए होटल

नीलगिरि व कोयम्बत्तूर अंचल में दिसम्बर व जनवरी का महीना वन विभाग के लिए मुश्किलों भरा साबित होने वाला है। इन घटनाओं पर वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि जिन इलाकों में हाथियों के झुण्ड आ रहे हैं। ये उनके परम्परागत रास्ते है। वे अपने बच्चों को गलियारों से परिचित कराने के लिए निकले हैं।

By: Dilip

Published: 08 Dec 2019, 12:15 PM IST

कोयम्बत्तूर. नीलगिरि व कोयम्बत्तूर अंचल में दिसम्बर व जनवरी का महीना वन विभाग के लिए मुश्किलों भरा साबित होने वाला है। इन घटनाओं पर वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि जिन इलाकों में हाथियों के झुण्ड आ रहे हैं। ये उनके परम्परागत रास्ते है। वे अपने बच्चों को गलियारों से परिचित कराने के लिए निकले हैं। सालों से यह क्रम चल रहा है, लेकिन उनके सुरक्षित मार्ग तक यदि आबादी का विस्तार होता है। खेती-बाड़ी की जाने लगी हो तो यह हाथियों का कसूर नहीं है। तड़ागम के लोग कई वर्ष से कह रहे हैं कि यहां गलियारे को रेत माफिया ने खोद कर तहस नहस कर दिया है।माफिया इतना क्रूर है कि वह हाथियों को खदेडऩे के लिए उन पर जेसीबी से हमला करता है। ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।इसके बाद भी माफिया काबू में नहीं है। नीलगिरि में तो हाथियों के गलियारे में होटल बन गए। आखिर अदालत के दखल के बाद उन्हें सील किया गया।

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